बिहार से लेकर असम तक छठी मैया का अलख जगा रहा राजू, छठव्रतियों की सेवा में हर साल खर्च कर देता है लाखों रुपए

अपने गांव में छठघाट का निर्माण कराते युवा व्यवसायी राजू

मिथिला पब्लिक न्यूज़, डेस्क ।


हम आज आपको राजू साहनी नाम के उस सख्शियत से रूबरू कराने जा रहे हैं जिसका भगवान भास्कर और छठी मैया के प्रति असीम श्रद्धा है. जो बिहार से लेकर असम तक छठी मैया का अलख जगा रहा है. छठव्रतियों की सेवा में हर साल लाखों रुपए खर्च कर देता है.

ये समस्तीपुर के उजियारपुर प्रखंड के भगवानपुर कमला गांव के रहने वाले हैं. वर्तमान में असम के गुवाहाटी में साहनी कांवरिया संघ के महामंत्री हैं. गुवाहाटी में इन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी स्थित भूतनाथ बांसघाट पर छठ पूजा समिति के नाम से एक सामाजिक संस्था की शुरुआत की है. जहां लाखों रुपए खर्च कर प्रत्येक वर्ष छठ घाट का निर्माण कराते हैं, वहां रह रहे हजारों बिहार वासी उस घाट पर छठ पूजा करते हैं.

छठ घाट का निर्माण, घाट की सजावट, लाइट की व्यवस्था, छठव्रतियों के सुविधा के लिए पंडाल, सौंदर्यीकरण, पेयजल एवं शौचालय आदि की व्यवस्था वे अपने निजी कोष से करते हैं. करें भी क्यों नहीं भगवान भास्कर ने उनकी मनोकामनाएं जो पूर्ण की है. असम में मजदूरी करने वाला राजू साहनी आज इतना सामर्थ्यवान हो गया है कि वह छठव्रतियों की सेवा में हर साल लाखों रुपये खर्च कर सकता है.

राजू ने हर साल की भांति इस साल भी गुवाहाटी के साथ साथ अपने पैतृक गांव भगवानपुर कमला पंचायत के देवखाल चौर स्थित कमला घाट पर भी छठ घाट का निर्माण कराया है. राजू के अनुसार जब वह अपने गाँव में छठ महापर्व के दौरान छठव्रतियों को गंदे जलाशयों में बिना समुचित व्यवस्था के अंधेरे में अर्घ्य अर्पित करते देखते थे, तो उन्हें बहुत पीड़ा होती थी. वह सोचते थे कि पूरे ब्रह्मांड को अपनी रोशनी से आलोकित करने वाले देवता की पूजा अंधकार में क्यों हो.

इतनी कठिनाईयों में पूजा होता देख उनका मन विचलित हो उठता था. वह अक्सर सोचते कि काश वह व्रतियों के लिए कुछ कर पाते. इसी बीच उन्होंने एक दिन सूर्यदेव से यह मन्नत मांगी कि, उन्हें इतना सामर्थ्यवान बनाएं कि, वह अकेले छठ व्रतियों के लिए पूरी व्यवस्था कर सकें.


नियति ने अपने समय चक्र में बदलाव किया और राजू सहनी को गुवाहाटी ले गया. जहां अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में संसार को झंझावातों को झेलते हुए उसने मजदूरी शुरू की. धीरे-धीरे व्यवसाय में बदलाव होता गया और आज सफलता उसकी कदम चूमती है.

शनिवार को राजू अपने गांव पहुंचे हैं. जहां रविवार को संध्या अर्घ के दौरान एक सम्मान समारोह का भी आयोजन किया जायेगा. जिसमें उल्लेखनीय योगदान देने वाले स्थानीय युवाओं, जनप्रतिनिधियों के साथ साथ समाजसेवियों को सम्मानित भी किया जाएगा.

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