पेटदर्द, उल्टी और दस्त हो तो समझ जायें कि लग गयी है ठंड, बच्चे व बुजुर्गों का रखें ख्याल


मिथिला पब्लिक न्यूज़, डेस्क ।


मौसम बड़ी तेजी से बदल रहा है. दिन में तेज धूप और रात में हाड़ कंपकपाती ठंड आम जनजीवन को परेशान करने लगी है. खासकर पिछले दो दिनों में अचानक से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. जिससे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होने लगा है. इससे कई तरह की बीमारियां भी पैर पसारने लगी है. उलटी-दस्त, वायरल फीवर, सर्दी जुकाम की शिकायत लेकर सबसे ज्यादा लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं.

मंगलवार को ओपीडी पहुंचे बहुतायत मरीज इसी तरह की समस्या लेकर पहुंचे थे. डॉक्टरों का कहना है कि अचानक सर्दी बढ़ गयी है. अगर आपने जरा भी लापरवाही की तो आपका बच्चा डायरिया, वायरल फीवर, सर्दी जुकाम जैसी बीमारियों की चपेट में आ सकता है. इस मौसम में ये बीमारियां तेजी से फैलती हैं.

इसलिए पेटदर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत हो तो समझ लेना चाहिए कि ठंड असर कर गया है और मरीज को डॉक्टरी सलाह की जरूरत है. चिकित्सकों की सलाह है कि इस मौसम में साफ-सफाई एवं कुछ खास बातों का ख्याल रखकर हम अपने एवं अपनों को इन मौसमी बीमारियों से दूर रख सकते हैं.

डॉ प्रतिभा कुमारी

काशीपुर स्थित आशीर्वाद हॉस्पीटल की डॉक्टर प्रतिभा कुमारी बताती हैं कि बुजुर्गों के साथ बच्चों पर इस मौसम में विशेष ध्यान देना चाहिए. नहीं तो वे वायरल फीवर डायरिया  निमोनिया जैसी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं. बच्चों को जब डायरिया व वायरल फीवर हो तो उस समय पानी की कमी को पूरा करने के लिए ओआरएस का घोल व पैरासिटामाॅल सीरप देना चाहिए. बच्चों को सभी टीके समय पर लगवाने चाहिए. यदि बच्चे को डायरिया या वायरल फीवर की शुरुआत र्हुइ हो तो ऐसे में तुरंत ओआरएस के घोल देने के साथ आप चावल व दाल का पानी बच्चे को एक समय अंतराल पर बराबर दे सकते हैं.



क्यों होता है डायरिया :
चिकित्सकों के अनुसार दूषित जल और भोजन करने से लोगों में डायरिया का प्रकोप बढ़ रहा है. खासकर बदलते मौसम और बरसात के दिनों में इसका खतरा बढ़ जाता है. डायरिया के लक्षण होने पर बच्चे को जिंक और ओआरएस का घोल देना चाहिए इससे लाभ मिलता है. डायरिया के कारण शरीर में बहुत अधिक पानी का नुकसान होता है इसलिए मतली और उल्टी का अनुभव होता है. इससे पेट में दर्द होती है और बार-बार शौचालय जाने की बारबार इच्छा होती है.


डायरिया में क्या करें :
– अधिक से अधिक साफ या उबला हुआ पानी पीना चाहिए.
– तत्काल ओआरएस का घोल बनाकर पीना चाहिए.
– बाहर का तला भुना, मसालेदार व बासी खाने से परहेज़ करना चाहिए.
– डायरिया होने पर केला व सेब के मुरब्बे का सेवन करना चाहिए.
– खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ जरूर धोना चाहिए.
– खाने में दही के साथ भिंडी, लौकी आदि मौसमी सब्ज़ियों का सेवन करना चाहिए. 



डॉक्टर से तुरंत मिलें, अगर आपके बच्चे :
– तीन या ज़्यादा घंटों से डायपर गीला न किया हो
– 102 डिग्री या उससे ज़्यादा बुखार हो
– बच्चे का मल खून वाला या काला हो
– जब दस्त में 24 घंटे बाद कोई सुधार न हो
– बेसुध हो, मुंह सूखा हो या बिना आंसू के रोता हो
– उसकी आंखें, गाल या पेट अंदर धंसे हुए लगें


बच्चों के देखभाल में इन बातों का रखें ख्याल :
– शिशु को छूने से पहले अपने हाथों को धो लें
– छह महीने तक के नवजात शिशु को मां का दूध पिलाएं
– नवजात शिशु को समय से सभी टीका लगवाएं
– सर्दियों में बच्चे के बेडरूम का तापमान गर्म बनाए रखें
– अपने बच्चे को गर्म और आरामदायक कपड़े पहनाएं
– सर्दियों में नवजात शिशु की मालिश का पूरा ध्यान रखें

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