
मिथिला पब्लिक न्यूज़, समस्तीपुर ।
जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर से बे पटरी होने लगी है. खासकर ओपीडी की स्थिति काफी दयनीय है. सुबह की ओपीडी में जहां कुछ डॉक्टर एक से डेढ़ घंटे विलंब से पहुंचते हैं, वहीं संध्याकालीन ओपीडी में एकाध डॉक्टर ही भीड़ निपटा जाते हैं. अब तो स्थिति यह है कि ट्रेनी एएनएम एवं आयुष चिकित्सक से भी मरीजों का इलाज करवा दिया जाता है.

गुरुवार की सुबह ओपीडी के सामान्य विभाग में कुछ ऐसा ही देखने को मिला. जहां ऑन ड्यूटी डॉक्टर गायब थीं और उनके स्थान पर कथित तौर पर इंटर्नशिप कर रहीं एक महिला आयुष चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रही थीं. आश्चर्यजनक बात तो यह था कि वह आयुष चिकित्सक होने के वाबजूद मरीजों को एलोपैथ (अंग्रेजी दवा) लिख रही थीं.

जानकारों की मानें तो वह इंटर्नशिप के दौरान किसी सीनियर चिकित्सक की देखरेख में ही किसी मरीज का इलाज कर सकती हैं, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं था. वैसे चर्चा यह भी है कि उक्त महिला आयुष चिकित्सक इंटर्नशिप के नाम पर अवैध तरीके से सदर अस्पताल में आती हैं. सिर्फ ये ही नहीं इमरजेंसी वार्ड में भी कई युवक अपने आप को प्रशिक्षु बताकर काम करते नजर आते हैं. जिसकी भनक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को नहीं लगती है.

कितनी आश्चर्य की बात है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार हर साल अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी ना तो मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सेवा का लाभ नहीं मिल पाता है. चिकित्सक एवं कर्मियों को ससमय डयूटी पर लाने में सफल नहीं हो पाती है. खासकर सरकारी अस्पताल के ओपीडी में नीम हकीम के तरह हर मर्ज का एक इलाज कर मरीज के भीड़ को निपटाया जा रहा है. समुचित इलाज करने के वजाय उन्हें एक दो दवा लिख कर दूसरे दिन आने की सलाह देकर लौटा दिया जाता है. मरीज का मर्ज अगर ठीक हो गया तो उनकी भाग से.

क्या कहते हैं उपाधीक्षक :
महिला आयुष चिकित्सक इंटर्नशिप कर रही हैं. उन्हें सीनियर चिकित्सक के साथ काम करना है. ओपीडी एवं इमरजेंसी वार्ड में किसी भी ट्रेनी के साथ सीनियर ऑन ड्यूटी डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मी को मौजूद रहना है.
डॉ गिरीश कुमार, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल











