उपलब्धि : समस्तीपुर में पहली बार किसी मरीज को लगाया गया परमानेंट पेसमेकर


– अत्याधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में समस्तीपुर की नई उपलब्धि
– कमला इमरजेंसी हॉस्पीटल में डॉ आरके झा की टीम ने शुरू की पेसमेकर लगाने की सुविधा

मिथिला पब्लिक न्यूज़, डेस्क ।


अत्याधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में अब समस्तीपुर जैसा छोटा शहर भी एक नया आयाम गढ़ने लगा है. जिस तरह के ऑपरेशन देश के बड़े शहरों में गिने चुने डॉक्टर ही करने को तैयार होते हैं, उस तरह के सैकड़ों जटिल ऑपरेशनों को समस्तीपुर के चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक कर दिखाया है. इसी कड़ी में समस्तीपुर के किसी अस्पताल में पहली बार किसी मरीज को परमानेंट पेसमेकर लगा कर उसे नयी जिंदगी दी गयी है.

इस उपलब्धि को शहर के मोहनपुर स्थित कमला इमरजेंसी हॉस्पीटल में डॉ आरके झा एवं उनकी टीम ने हासिल की है. अब समस्तीपुर के कमला इमरजेंसी हॉस्पीटल में परमानेंट पेसमेकर लगाने की सुविधा शुरू की गयी है. इस अस्पताल में मंगलवार की शाम वेंटिलेटर पर जीवन और मौत से जूझ रहे एक मरीज को परमानेंट पेसमेकर लगाकर उसकी जान बचाई गयी है.समस्तीपुर के चिकित्सा जगत में ऐसा पहली बार हुआ है. इस उपलब्धि को हासिल कर कमला इमरजेंसी हॉस्पीटल भी देश भर के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों के बराबर में आ खड़ी हुई है. अब समस्तीपुर के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए यह एक नई आशा की किरण बनकर उभरी है.


यहां बता दें कि डॉ आरके झा समस्तीपुर के एक मात्र क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ हैं जो क्रिटिकल केयर में 10 वर्षों से ज्यादा का अनुभव रखते हैं. इतना ही नहीं ये अपनी विधा में गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं और उन्होंने क्रिटिकल केयर में फेलोशिप भी किया है. समस्तीपुर में प्रथम आईसीयू तथा क्रेटिकल केयर की स्थापना का श्रेय भी इन्हीं को जाता है. अब पेसमेकर की सुविधा की शुरुआत कर कमला इमरजेंसी ने समस्तीपुर के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने का काम किया है.


मरीज के साथ पूरी टीम ने मौत से की लड़ाई :


कमला इमरजेंसी हॉस्पीटल के चेयरमैन डॉ राजेश कुमार झा इस सफलता को पाने में हुई झंझावातों को याद करते हुए बताते हैं कि पांच दिन पूर्व 15 दिसंबर को जितवरिया के मरीज उमेश कुमार की हृदय गति अचानक से रूक गई थी. बेहोशी की हालत में परिजनों ने मरीज को उनके हॉस्पिटल में भर्ती कराया. मरीज को देखा तो बचने की संभावना नगण्य दिखी, लेकिन कहते हैं कि दिल से की गई मेहनत पर ईश्वर भी वरदान देता है, इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ.

प्राण रक्षा के लिए अंतिम प्रयास करते हुए उन्होंने मरीज को तुरंत अस्थाई पेसमेकर लगाया. जिससे हृदय धड़कने पर मजबूर हुआ, लेकिन तबतक मरीज कोमा में जा चुका था. उस मरीज को वेंटीलेटर पर रखकर जीवन देने का प्रयास जारी रखा. जांच के दौरान मरीज को किडनी की बीमारी भी निकली और ऐसे में डायलिसिस कर पाना भी असंभव सा था, क्योंकि मरीज का जीवन पूर्ण रूपेण जीवन रक्षक उपकरण पर चल रहा था. दूसरे दिन भी मरीज पूर्ण कोमा में रहा और शरीर में कोई हड़कत नही आई. हमलोग मायूस हो गए थे परंतु हमारी टीम ने अंत तक मरीज के साथ मौत से लड़ाई का फैसला किया.

मरीज के परिजनों के दृढ़ विश्वास ने हमारा हौसला बढ़ाया. धीरे धीरे बिना डायलिसिस के ही मरीज की किडनी की हालत ठीक होने लगी और तीसरे दिन जब हाथों में थोड़ी हड़कत दिखाई पड़ी तो हमें आशा की किरण दिखाई देने लगी. अन्यथा प्रतीत हो रहा था कि अस्थायी पेसमेकर लगाने के बाद भी कहीं हम मरीज को बचा न पायें. अंततः मरीज को चौथे दिन होश आ गया और वेंटिलेटर से वापस आते ही उन्होंने उक्त मरीज को स्थाई पेसमेकर लगायी. अब मरीज खतरे से बाहर हो गया है. डॉ श्री झा ने मरीज के परिजनों को उनपर एवं उनकी टीम पर धैर्य के साथ विश्वास करने के लिए आभार व्यक्त किया है.

Leave a Comment

Read More

error: Content is protected !!