


मिथिला पब्लिक न्यूज, डेस्क ।
हीरा ज्वेलर्स लूटकांड समस्तीपुर का सबसे बड़ा लूटकांड माना जाता है. ऐसा लगता है कि यह लूटकांड समस्तीपुर पुलिस के दामन पर हमेशा काला धब्बा बनकर ही रह जायेगा. इस लूटकांड को अंजाम देने में लुटेरों को सहयोग करने वाली महिला शागिर्द के साथ-साथ लाइनर व ज्वेलरी के खरीदार को पकड़ा जा चुका है. कथित रूप से पकड़े गए बदमाशों के पास से लूटे गये कुछ आभूषण भी बरामद किये गए, लेकिन ये काफी नहीं थे.

कहा जाता है कि हीरा ज्वेलर्स से लूटे गए एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के गहने-जेवरात अभी तक ना तो पुलिस बरामद नहीं कर पायी है और ना ही इस घटना को अंजाम देने वाले मुख्य अपराधी ही पकड़े जा सके हैं. जिस वजह से इस घटना में लूटी गई पूरी जेवरात बरामद नहीं हो पायी है. जेवरात की बरामदगी समस्तीपुर पुलिस के लिये किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है.

घटना के बाद शुरुआती दिनों में जिला पुलिस ने संजीदगी भी दिखाई, जिसका परिणाम भी देखने को मिला. कुछ लाख के गहने भी बरामद किए गए, लेकिन ये काफी नहीं थे. बताया जाता है कि घटना के बाद अपराधी बोरे में भरकर गहने जेवरात ले गये थे. बाइक पर बोरा रखकर भाग रहे अपराधियों का सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के पास हैं, लेकिन इसके बावजूद उन ज्वेलरी की बरामदगी नहीं हो पाना, पुलिस की नाकामयाबी दर्शाने के लिए काफी है.

वैसे इस घटना में मुफस्सिल थाना पुलिस ने फरार चल रहे एक वांछित अपराधी को एक दिन पहले बेगूसराय से गिरफ्तार किया है. पकड़े गए अपराधी की पहचान बेगूसराय के बलिया थाना क्षेत्र के परवल टोली नगरगावां के महराणा सिंह के पुत्र ज्योति सिंह के रूप में की गयी है. एएसपी संजय कुमार पांडेय बताते हैं कि 6 दिसंबर 2022 को हुई उस लूटकांड में ज्योति ने अपने स्कार्पियो से इन अपराधियों को भागने में मदद की थी.

यहां बता दें कि इस लूटकांड में एक महिला एवं 06 पुरूष शामिल थे. इस कांड में एसआइटी ने पहले अटेम्प्ट में लाइनर रवि राय के साथ लूट के जेवरात खरीदने वाले ज्वेलरी विक्रेता सहित चार अपराधकर्मियों को गिरफ्तार किया था. इनके पास से 6-7 लाख के जेवरात भी बरामद किए गए थे. घटना के करीब चार महीने बाद एसटीएफ ने पटना से इस लूटकांड में शामिल महिला शागिर्द अंजली को गिरफ्तार किया था. लेकिन स्कार्पियो चालक ज्योति सिंह फरार चल रहा था. पुलिस ने मानवीय आसूचना संकलन एवं तकनीकी अनुसंधान के आधार पर उसे गिरफ्तार किया है.

पुलिस की मानें तो घटनास्थल से बाइक से भागने के बाद सभी अपराधी कुछ दूर जाकर इसकी स्कार्पियो पर बैठ गये थे. एएसपी के अनुसार इस घटना को अंजाम देने के लिए मास्टरप्लान बनाया गया था. जिसमें मास्टरमाइंड ने अलग-अलग जगहों के अपराधियों को शामिल किया था. जो एक दूसरे को पहचानते नहीं थे. यही कारण है कि इस घटना में मुख्य अपराधी की गिरफ्तारी नहीं हो पायी है.














