अलविदा 2023 : स्वास्थ्य विभाग में सालों भर चलता रहा निर्माण व डेंटिंग पेंटिंग का काम, मरीज के इलाज पर नहीं दिया गया ध्यान

# स्वास्थ्य विभाग में संसाधन तो बढ़ा लेकिन इलाज के नाम पर बस हुई खानापूरी
# प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को रैफर करना आज भी डॉक्टरों की मजबूरी

मिथिला पब्लिक न्यूज़, समस्तीपुर ।

पिछले वर्षों के भांति 2023 भी अब अलविदा कहने को है. सरकार इस वर्ष भी पूरे साल स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास करती दिखी. इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया. सालों भर पुराने भवनों को तोड़जोड़ कर उसका डेटिंग-पेंटिंग एवं नये भवन का निर्माण कार्य आदि चलता रहा. भवनों के निर्माण कार्य से सरकारी अस्पतालों की सूरत  तो बदली जा रही है, लेकिन सीरत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. सदर अस्पताल परिसर में करोड़ों की लागत से मॉडल एवं शिशु अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है. लेकिन इन सबके बावजूद अस्पताल में आज भी सुविधाओं का टोटा बना है.


अस्पतालों को संसाधनों एवं अत्याधुनिक स्वास्थ्य उपकरणों से भी लैस किया गया. लेकिन इन सबके वाबजूद जिले के मरीज के साथ इलाज के नाम पर बस खानापूरी ही की गयी. सारी सुविधाएं उपलब्ध रहने के वाबजूद मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य सेवा का जो सम्पूर्ण लाभ उन्हें मिलना चाहिए था, वो नहीं मिला. इसके पीछे प्रशासनिक अनदेखी सबसे बड़ा कारण बताया जाता है.

खासकर जिला अस्पताल में आईसीयू, वेंटिलेटर एवं अल्ट्रासाउंड जांच की मूलभूत सुविधाएं आजतक मरीजों को नहीं मिली. 13 साल पहले लाखों रुपये से निर्मित आईसीयू भवन का अस्तित्व भी खत्म हो गया. उसको तोड़कर अब वहां मॉडल अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है.


कहने को तो जिला अस्पताल में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्स-रे, ईसीजी, आईसीयू, वेंटीलेटर, डायलिसिस, एसएनसीयू, एवं अत्याधुनिक उपकरणों से लैस प्रसव कक्ष व ऑपरेशन थियेटर स्थापित हैं. लेकिन इन सबके वाबजूद मरीजों को बेहतर सेवा के लिए डीएमसीएच एवं पीएमसीएच के साथ साथ निजी अस्पतालों में ही जाना पड़ता है.

डायलिसिस एवं सिटी स्कैन कि सेवा जो पीपीपी मोड पर उपलब्ध करायी जा रही है, उसी का लाभ मरीजों को सही तरीके से मिल पा रहा है. बाजार से आधे से कम रेट पर मरीजों को सिटी स्कैन की सेवा उपलब्ध करायी जा रही है.
विशेषज्ञ चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मियों के आभाव में जिला अस्पताल में रखे इकलौते अल्ट्रासाउंड मशीन को जंग लग रहा है. जिस वजह से गरीब महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी जांच घरों में जाना पड़ता है. गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो पा रहा है.

वैसे कुछ मामलों में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था काफी बेहतर भी हुई है. एसएनसीयू, प्रसव कक्ष व ऑपरेशन थियेटर को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस किया गया. लेकिन डॉक्टरों का अभाव एवं वरीय अधिकारियों के इक्षाशक्ति की कमी यहां भी हावी है. कोरोना काल में जिले के सभी अनुमंडलीय अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगायी गयी, लेकिन किसी स्थान पर यह सुचारू रूप से काम नहीं कर रही है. आज भी सभी सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर एवं ऑक्सीजन सेपरेटर मशीन से ही काम चलाया जा रहा है.

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