चालकों के हड़ताल से जनजीवन हुआ अस्त व्यस्त, दूसरे दिन सुबह से ही सड़क पर उतरे चालक, जगह-जगह किया सड़क जाम


मिथिला पब्लिक न्यूज़, डेस्क ।
भारत सरकार के द्वारा हिट एंड रन को लेकर मोटर वाहन अधिनियम में किये गए बदलाव और कानून को सख्त बनाने के कारण वाहन चालकों में आक्रोश व्याप्त है. इस नियम के तहत दोषी पाए जाने पर चालक को 10 साल की सजा और 7 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. जिसके विरोध में चालक वाहन छोड़ सड़क पर उतर आए हैं. मंगलवार की सुबह दूसरे दिन भी आवागमन पूरी तरह से ठप रहा. जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है.

समस्तीपुर में मगरदहीघाट को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया है. इससे भयानक जाम की स्थिति बन गयी है. पैदल चलने वाले राहगीरों को भी नहीं निकलने दिया जा रहा है. चालकों के चक्का जाम हड़ताल को भारत बंद का शक्ल दे दिया गया है. पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बनी हुई है. बूढ़ी गंडक पुल पर घंटों से हजारों की संख्या में लोग फंसे हुए हैं. लेकिन इसको लेकर कोई ठोस पहल नहीं किया जा रहा है.

सुबह से ही चालकों का समूह टुकड़ियों में बंटकर सड़क पर उतर आया. चालकों ने जगह-जगह सड़क जाम कर दिया है. कुछ जगहों पर चालकों के भीड़ में शामिल उपद्रवियों ने उपद्रव भी मचाया है. राहगीरों के साथ गालीगलौज व मारपीट भी किये जाने की सूचना मिल रही है. सड़क जाम कर रहे लोग बाइक एवं सायकिल सवार को भी रोक रहे हैं.

चालकों के हड़ताल के कारण आवागमन पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया है. मंगलवार को दूसरे दिन हड़ताल से यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई. इसका असर पूरे मिथिलांचल में देखने को मिल रहा है. जगह जगह चालकों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन भी किया है. सवारी गाड़ियों का परिचालन तो पूरी तरह से ठप हो रखा है, प्राइवेट एवं स्कूल वाहनों को भी नहीं चलने दिया जा रहा है.

बस पड़ाव में वीरानगी छाई हुई है. कर्पूरी बस पड़ाव समस्तीपुर से दूसरे दिन भी यात्री बसों का परिचालन नहीं हुआ. जिले के विभिन्न रैक प्वाइंटों से तथा एसएफसी के गोदामों से भी ट्रकों का परिचालन नहीं हुआ.वाहनों के नहीं चलने से आम यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. यात्रियों को जगह-जगह सड़कों पर वाहनों का इंतजार करते देखा जा रहा है.

शहरी क्षेत्र में बड़े वाहनों का परिचालन तो ठप रहा ही है साथ ही साथ ई रिक्शा एवं बाइक तक को नहीं चलने दिया जा रहा है. जिला मोटर व्यवसायी संघ एवं सीटू द्वारा भारत सरकार के इस कानून को पूरी तरह से काला कानून बताया जा रहा है. मंगलवार को आंदोलन को और उग्र बनाने की तैयारी के लिए जिला संगठन के कार्यकारिणी की बैठक बुलायी गयी है. जिसमें सरकार द्वारा विधेयक वापस नहीं लेने के स्थिति में व्यापक आंदोलन चलाने का निर्णय लिया जायेगा.

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