चार वर्षों बाद समस्तीपुर सदर अस्पताल को मिला रेडियोलॉजिस्ट, अब शायद मरीजों को मिलेगी अल्ट्रासाउंड की सुविधा


मिथिला पब्लिक न्यूज़, समस्तीपुर ।
चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे सदर अस्पताल के लिए अच्छी खबर है. स्वास्थ्य विभाग ने समस्तीपुर सदर अस्पताल को दो नया डॉक्टर दिया है. जिसमें एक हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ विवेकानंद कुमार हैं, जबकि दूसरे रेडियोलॉजिस्ट डॉ दीपक कुमार हैं. समस्तीपुर सदर अस्पताल को करीब चार वर्षों से रेडियोलॉजिस्ट की दरकार थी. जो एक बार फिर काफी जद्दोजहद के बाद पूरा किया गया है.

अगर डॉ दीपक समस्तीपुर सदर अस्पताल में योगदान देते हैं तो अब शायद सदर अस्पताल में मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी. सदर अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को किसी तरह पाटने का ही काम किया गया है. पदस्थापित किये गए हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ विवेकानंद कुमार को सरकार ने राज्य में तीन वर्षों के अनिवार्य सेवा देने के लिए पदस्थापित किया है. जबकि एमडी रेडियो डाइग्नोसिस डॉ दीपक कुमार की सदर अस्पताल को काफी अरसे से जरूरत थी.

सदर अस्पताल का अल्ट्रासाउंड पिछले करीब चार वर्षों से बंद पड़ा है. सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के बंद रहने के कारण गरीब मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. सदर अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर में पदस्थापित विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ बलराम प्रसाद के दानापुर में प्रतिनियुक्ति एवं बाद में स्थानांतरण किये जाने को लेकर यह व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ गई थी.

पिछले चार वर्षों से मरीजों को इसकी सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही थी. जानकार बताते हैं कि साढ़े तीन साल की कड़ी मशक्कत के बाद 9 अगस्त 2019 को सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा को एक बार फिर से शुरू किया गया था. उस समय दलसिंहसराय के चिकित्सक डॉ एसके गुप्ता को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गयी थी. कुछ दिन मरीजों को इस सेवा का लाभ भी मिला.

इसके बाद जिले में दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ बलराम प्रसाद का समस्तीपुर में पदस्थापन हुआ. लेकिन कुछ दिनों बाद ही उनकी प्रतिनियुक्ति एक बार फिर से दानापुर कर दी गयी. जहां बाद में उनका पदस्थापन भी हो गया था. सरकारी  अल्ट्रासाउंड के बंद रहने के कारण गरीब मरीजों को प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जाना पड़ता है. जहाँ अल्ट्रासाउंड करने के एवज में उनका आर्थिक शोषण किया जाता है. निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों से 500 रुपये से 3500 रुपये तक वसूल किये जाते हैं.

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