

मिथिला पब्लिक न्यूज़, समस्तीपुर ।
समस्तीपुर के सरायरंजन थाना में 63 वर्षीय एक वृद्ध की पुलिस अभिरक्षा में मारपीट से मौत हो जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मृतक सरायरंजन थाना क्षेत्र के झखरा गांव के रहने वाले कृष्ण भगवान झा उर्फ टूना झा बताये जाते हैं। घटना मंगलवार देर रात की है। 23 वर्ष पुराने एक मामले में कोर्ट का गिरफ्तारी वारंट निकला हुआ था। जिसमें गिरफ्तार कर पुलिस ले गयी थी। जहां पुलिस अभिरक्षा में ही उनकी मौत हो गयी। पुलिस ने मौत की सूचना भी परिजनों को नहीं दी।

जिससे आक्रोशित परिजनों ने बुधवार की अहले सुबह सदर अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिजनों का कहना था कि उन्हें किसी तरह की बीमारी नहीं थी। थानाध्यक्ष एवं उनकी पुलिस ने उनके साथ मारपीट की है, जिससे उनकी मौत हो गयी। बाद में घटना की सूचना पर पहुंचे एएसपी सह सदर डीएसपी संजय कुमार पांडेय ने किसी तरह परिजनों को समझा बुझाकर शांत किया। उन्होंने परिजनों को सभी बिंदुओं पर जांचकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। जिसके बाद परिजन शांत हुए और शव का पोस्टमार्टम कराया गया।

सांत्वना देने पहुंचे मंत्री विजय चौधरी :
उधर, घटना की सूचना पर बुधवार की दोपहर मंत्री सह स्थानीय विधायक विजय कुमार चौधरी भी झखरा पहुंचे। मृतक के परिजनों से मिलकर घटना की पूरी जानकारी ली, और उन्हें सांत्वना देते हुए घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया। इस घटना से पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। काफी संख्या में लोग शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने पहुंचे हुए हैं।

गिरफ्तारी के विरोध से आक्रोशित पुलिस ने की मारपीट :
बताया जाता है कि उनपर 23 वर्ष पुराने एक मामले में कोर्ट से वारंट निकला हुआ था। जिस वारंट के आधार पर थानाध्यक्ष ने पुलिस टीम के साथ देर रात उन्हें गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान विरोध एवं भागने का प्रयास करने पर पुलिस उन्हें मारते-पीटते घसीटकर गाड़ी में डालकर थाने ले गयी थी। जहां मारपीट से उनकी मौत हो गयी।

मृतक के भाई ने पुलिस पर हत्या का आरोप :
घटना को लेकर मृतक के भाई राधा कृष्ण झा ने नगर थाना पुलिस से एक लिखित शिकायत भी की है। उन्होंने कहा है कि 1991 में उनके भाई पर एक केस हुआ था। जिसमें वे जमानत पर थे। मंगलवार की रात करीब 11 बजे सरायरंजन थानाध्यक्ष रविकांत कुमार पुलिस बल के साथ उसके घर पर पहुंचे। थानाध्यक्ष ने उनके भाई को कहा कि आपके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट है। न्यायालय में जो केस था उसमें जमानत रद्द हो गया है।

जिस पर उनके भाई ने थानाध्यक्ष से कहा कि हम अपने वकील से बात कर लेते हैं, अगर जमानत रद्द हो गया होगा तो हम न्यायालय में उपस्थित हो जायेंगे। जिस पर थानाध्यक्ष ने घर पर ही गाली गलौज करते हुए उसके भाई के साथ मारपीट करने लगे। इसका उन्होंने भी विरोध किया, लेकिन पुलिस उसके भाई को मारते-पीटते घसीटते हुए गाड़ी में बैठा कर थाना ले गये। कुछ देर के बाद जब वे भाई का शॉल और चप्पल लेकर थाना पर देने पहुंचे तो उन्हें पता चला कि उनके भाई की मौत हो गयी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया है। इसके बाद वे सदर अस्पताल पहुंचे, जहां इमरजेंसी वार्ड में उनके भाई की लाश पड़ी हुई थी।

पुलिस कहती है छत से कूदने व भागदौड़ के कारण बिगड़ी तबियत :
हालांकि पुलिस का कहना है कि 1991 के एक आपराधिक मामले में उनपर कोर्ट से लाल वारंट निर्गत था। जिस वारंट के आधार पर पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी करने के लिए उसके घर पर देर रात पहुंची थी। पुलिस के आने की भनक मिलते ही वे (आरोपी) अपने छत से होकर दूसरे के छत पर छ्लांग लगाकर भागने लगे। आरोपी को भागते देख पुलिस जवानों ने खदेड़ कर उसे पकड़ा था। पुलिस का कहना है कि छत से कूदने और भागदौड़ के कारण आरोपी की तबीयत बिगड़ गयी थी। जिसके बाद उसे स्थानीय अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया। जहां से चिकित्सकों के द्वारा समस्तीपुर सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस के द्वारा इसकी जानकारी परिवार के सदस्यों को दी गई थी। इसके बाद परिवार के सदस्य भी समस्तीपुर सदर अस्पताल पहुंचे थे।

क्या कहते हैं एएसपी :
एएसपी सह सदर डीएसपी संजय कुमार पांडेय ने इस घटना को लेकर बताया कि पुलिस पूरे मामले से जुड़े सभी बिंदुओं पर बारीकी से जांच कर रही है। किन कारणों से मौत हुई है इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पायेगा। मृतक के भाई ने भी एक आवेदन दिया है। जिसे नियमानुसार पुलिस ने रिसीव कर लिया है। जो भी विधि सम्मत कार्रवाई होगी की जायेगी।











