


मिथिला पब्लिक न्यूज़, समस्तीपुर ।
समस्तीपुर सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्था को खुद इलाज की जरूरत है। इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्था खुद बीमार चल रही है, यहां मरीजों का इलाज क्या होगा। जिम्मेदार सब कुछ जानते हुए भी अपनी जिम्मेदारियों से भागते रहते हैं। जिसका नतीजा है कि सरकार के लाख कोशिशों के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है।


बताया जाता है कि एक सप्ताह से वेंटिलेटर पर जीवन और मौत से जूझ रहे कार्डियक मॉनिटर ने भी अब पूरी तरह से दम तोड़ दिया है। जिस वजह से इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने वाले गम्भीर मरीजों की समुचित जांच और देखभाल नहीं हो पा रहा है। खासकर मॉनिटर खराब होने के कारण बेहोशी की हालत में भर्ती होने वाले मरीजों का पल्स रेट, बीपी, ऑक्सीजन लेबल आदि का लगातार पता नहीं चल पाता है। जिस कारण से मरीजों के इलाज में डॉक्टरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इमरजेंसी वार्ड के चिकित्सकों ने अस्पताल प्रशासन से इसकी शिकायत भी की है, लेकिन एक सप्ताह बाद भी इसपर ध्यान नहीं दिया गया है। इमरजेंसी वार्ड में मौजूद नर्सिंग स्कूल के प्रशिक्षु उस मॉनिटर में बैंडेज पट्टी बांधकर किसी तरह चला रहे थे, लेकिन अब उन्होंने भी जबाब दे दिया है।

वैसे भी सदर अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड बस नाम के लिए है। यह तो बस रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। यहां सिर्फ मारपीट के मामलों में इंज्युरी का काम होता है। मरीज के परिजनों को घाव पर टांका लगवाने के लिए सुई-धागा तक खुद खरीद कर लाना पड़ता है। अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को किस स्तर की स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराई जा रही है।














