शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों में अधिकतर खराब, भगवान भरोसे सुरक्षा व्यवस्था, बड़ी घटनाओं के बाद दर-दर भटकती है पुलिस

– शहर में मात्र तीन-चार जगहों पर काम कर रहा सीसीटीवी कैमरा, जिला प्रशासन बेखबर
– लाखों खर्च होने के बावजूद नहीं हो रहा सीसीटीवी कैमरों का मेंटेनेंस
– अक्सर बड़ी घटनाओं के बाद पुलिस को आती है सीसीटीवी कैमरों की याद


मिथिला पब्लिक न्यूज़, समस्तीपुर ।

जिला मुख्यालय की 24 घंटे निगहबानी करने के लिए लगाये गए लगभग सभी सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं। उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। जिला प्रशासन इससे बेखबर है। पुलिस को तो बस बड़ी घटनाओं के बाद सीसीटीवी कैमरों की उस समय याद आती है, जब उसे फुटेज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। वैसे शहरवासियों की सुरक्षा व्यवस्था पहले भी भगवान भरोसे थी और आज भी उन्हीं के भरोसे है।

जानकार बताते हैं कि शहर में लगाये गये 32 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाये गए थे। जिनमें 25 से अधिक कैमरों ने तो पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया है। मात्र दो-तीन कैमरे ही चालू हालत में हैं। यह स्थिति कोई नई नहीं है, पिछले तीन-चार वर्षों से है।

जानकार सूत्रों का कहना है कि इसे लगाने में लाखों रुपये खर्च तो कर दिए गए, लेकिन मेंटेनेंस एवं पावर सप्लाई की समुचित व्यवस्था नहीं की गयी। कुछ वर्ष पूर्व एक दर्जन कैमरे को चालू किया गया था, लेकिन वे भी अग्निवीर आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव एवं बरसात के समय आयी आंधी-तूफान एवं सड़क दुर्घटनाओं के भेंट चढ़ गए हैं। मगरदहीघाट, चीनी मिल, होटल कैलाश इन, लखना चौक, स्टेशन रोड एवं मोहनपुर रोड में कई स्थानों से कैमरा भी गायब हो चुका है।

सीसीटीवी कैमरों के खराब रहने के कारण शहर में होने वाली संदिग्ध गतिविधि की जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। अपराधी भी छोटी-मोटी घटनाओं को अंजाम देकर आराम से बच निकल रहे हैं। शहर एवं आसपास के इलाकों में बाइक चोरी और छीनछोर कि घटनाएं आम हो गयी हैं। जिसका थाने में अब प्राथमिकी दर्ज नहीं होता, बस सनहा किया जाता है। यह अनदेखी पुलिस प्रशासन को कभी भी भारी पड़ सकती है। क्योंकि बड़ी घटना के बाद पुलिस को इन कैमरों के फुटेज की जरूरत पड़ती है। लेकिन अधिकतर मामलों में कैमरों के खराब रहने की वजह से उन्हें फुटेज नहीं मिल पाता है। रिलायंस ज्वेल्स डकैती की घटना में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। पुलिस को अपराधियों की गतिविधियों के फुटेज के लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ी है।

यहां बता दें कि शहर की सुरक्षा के लिए नगर पालिका क्षेत्र के विभिन्न चौक चौराहों पर लगाए गए विज्ञापन होडिंग पोल पर हाई क्वालिटी का सीसीटीवी कैमरा लगाया गया था। इसमें कई कैमरे मूविंग पोजिशन वाले भी थे। इन सभी कैमरों का नियंत्रण कक्ष नगर थाने में बनाया गया है। जहां से कथित तौर पर कर्मी शहर पर निगरानी रखते हैं। घटना के बाद इन सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से अपराधियों की पहचान करने में पुलिस को मदद मिल सकती है।

कई कांडों के खुलासे में मददगार बना है सीसीटीवी :
शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से पुलिस ने कई कांडों का खुलासा भी किया है। खासकर बैंक लूटकांड एवं रोड रॉबरी में यह काफी मददगार साबित होता है। गोला रोड में हुई यूको बैंक लूटकांड के साथ बारह पत्थर के ज्वेलरी व्यवसायी के घर हुई डकैती, स्टेशन रोड के पालीवाल ड्रग्स में हुई डकैती के अलावा वकील हत्याकांड एवं मार्बल व्यवसायी लूटकांड सहित कई लूटकांड का खुलासा सीसीटीवी कैमरों की मदद से हो चुका है। वहीं कई बाइक चोरों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

इन स्थानों पर लगा था सीसीटीवी कैमरा :
मगरदहीघाट मंदिर, मगरदहीघाट चौराहा, होटल स्वर्ग के पास, गणेश चौक पर, नीम गली चौक, गोला रोड चौक, अनुरूप टॉकीज, बहादुरपुर पेट्रोल पम्प, पुरानी पोस्ट ऑफिस रोड, चीनी मिल चौक, दुनदुनिया गुमटी, रामबाबू चौक, राज साईकिल स्टोर, रेड एन्ड चिफ शोरूम, स्टेशन रोड छोटी मस्जिद, रेलवे जंक्शन पर, बस स्टेण्ड ताजपुर रोड, भोला टॉकिज के पास, अजाद चौक के पास, एलआईसी ऑफिस, कचहरी केम्पस, काशीपुर लखाना चौक, थानेश्वर मन्दिर के पास, समाहरणालय के पास, पटेल गोलम्बर, सदर हॉस्पीटल, सर्किट हाउस के पास, बजाज एजेन्सी के पास, क्रान्ति हॉटल के पास, बीआरबी कॉलेज के पास एवं यूनियन बैंक के पास सीसीटीवी कैमरों को लगवाया गया था।

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