


मिथिला पब्लिक न्यूज़, कमलेश झा ।
समस्तीपुर में फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले 5 शिक्षकों के विरुद्ध निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। समस्तीपुर के अलग-अलग विद्यालयों में फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले शिक्षकों में पांच पर अब प्राथमिकी दर्ज करा दी गयी है।

उनके खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना के पुलिस उपाधीक्षक गौतम कृष्ण ने एफआईआर दर्ज कराया है। पुलिस उपाधीक्षक गौतम कृष्ण समस्तीपुर जिला शिक्षक नियोजन जांच के सह सहायक जांचकर्ता भी हैं। समस्तीपुर में इस कार्रवाई के बाद फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले शिक्षकों में हड़कंप मच गया है।

जिन शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज कराया गया है, उनमें चार कल्याणपुर प्रखंड के जबकि एक वारिसनगर प्रखंड के हैं। इनमें कल्याणपुर की एक महिला शिक्षिका भी शामिल हैं। जो कल्याणपुर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बारहगामा की शिक्षिका काजल कुमारी बतायी जाती हैं। जिनका इंटर का प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया था। जबकि अन्य शिक्षकों का शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है।


फर्जी शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले जिन चार शिक्षकों के विरुद्ध प्रथमिकी दर्ज की गई है, उनमें कल्याणपुर के राजकीय मध्य विद्यालय मंजिल मुबारक के शिक्षक राजीव कुमार, राजकीय मध्य विद्यालय लादौरा के शिक्षक राम सकल सहनी, उत्क्रमित मध्य विद्यालय जटमलपुर ढाब के शिक्षक अर्जुन दास एवं वारिसनगर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय मोहिउद्दीनपुर के शिक्षक अमित कुमार रंजन बताये जाते हैं।

बताया जाता है कि करीब दस साल पूर्व उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गयी थी। उच्च न्यायालय के आदेश पर वर्ष 2015 में निगरानी विभाग को इसकी जांच सौंपी गयी। हाईकोर्ट के आदेश पर जिले में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर बहाल शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच निगरानी विभाग कर रही है. इसी जांच के क्रम में जिले के पांच शिक्षकों का प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है। जिसके बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पुलिस उपाधीक्षक ने प्राथमिकी दर्ज कराई है।

जानकारों का कहना है कि समस्तीपुर में नियोजित शिक्षकों की बहाली में जमकर फर्जीवाड़ा हुआ था। जनहित याचिका दायर किये जाने के बाद जिले के 11 हजार से अधिक नियोजित शिक्षकों के प्रमाण पत्र की जांच की जानी है। सूत्रों की मानें तो इनमें करीब साढ़े तीन हजार से अधिक शिक्षकों के फोल्डर तक गायब हो चुके हैं। अगर निगरानी विभाग इस मामले की सही तरीके से जांच करे तो समस्तीपुर में बहुत बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।













