

मिथिला पब्लिक न्यूज़, कमलेश झा ।
रिलायंस ज्वेल्स डकैती कांड में शामिल लुटेरों को 22 दिन बाद भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पायी है। गिरफ्तारी को छोड़िए उन अपराधियों की पहचान तक नहीं हो पायी है। जबकि बिहार पुलिस का पूरा तंत्र रिलायंस ज्वेल्स को लूटने वाले इन अपराधियों की पहचान में लगा हुआ है। घटना में शामिल बदमाशों का चेहरा सीसीटीवी फुटेज में साफ साफ दिख रहा है। जिनकी तस्वीर समस्तीपुर पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी डालकर कर पहचान करने वालों को 25 हजार रुपए इनाम देने की भी घोषणा कर रखी है। इन अपराधियों का फोटो बिहार एवं दिल्ली के एसटीएफ, क्राइम ब्रांच एवं झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश की पुलिस के साथ साथ सभी थानों, हर जिले की पुलिस एवं उनकी डीआईयू टीम को भेजा गया है।

दूसरे ग्रह से टपक कर तो नहीं आये होंगे बदमाश :
आजतक पुलिस के पास कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लग पाया है, जिससे कि अपराधियों की पहचान हो पाए। इतना कुछ होने के बाद भी बदमाशों का पहचान नहीं हो पाना पुलिस के सूचना तंत्र एवं अनुसंधान के तरीके पर सवाल खड़ा कर रहा है। ऐसा तो हो नहीं सकता कि समस्तीपुर में रिलायंस के ज्वेलरी शोरूम को लूटने के लिए अमेरिका और जापान से बदमाश को बुलाया गया हो। या अचानक से आसमान से टपक कर दूसरे ग्रह के बदमाशों ने तो इस डकैती को अंजाम दिया नहीं होगा।

कोई तो होगा लोकल लाइनर :
वे तो समस्तीपुर एवं आसपास के जिलों के ही थे। कोई न कोई तो लोकल लाइनर होगा और इस घटना में लोकल बदमाशों की भूमिका 100% है भी। क्योंकि लूटपाट के दौरान उनके बात करने का तरीका और भाषा स्थानीय ही था। बदमाशों का पहनावा-ओढावा, जूते- चप्पल यहां तक कि उनके हथियार भी लोकल मेड लग रहे थे। झोला तक उनलोगों की नई-नई थी। जिसमें वे करोड़ों के ज्वेलरी भरकर ले गए। इतना ही नहीं घटना के समय ज्वेलरी शोरूम में मौजूद कर्मी एवं ग्राहक ने भी बताया था कि वे स्थानीय भाषा में ही बात कर रहे थे। तो जब स्थानीय भाषा में बात कर रहे थे लाजमी है बदमाशों में कुछ तो जरूर आसपास के ही बदमाश होंगें।

पुलिस में मोनेटरिंग का दिखा अभाव :
कुल मिलाकर देखा जाय तो इस घटना के बाद पुलिस को जिस तरह से काम करना चाहिए था, शुरुआती समय में उस तरीके से पुलिस के द्वारा कोई काम नहीं किया गया। जानकारों की मानें तो समस्तीपुर एसपी अगर स्वंय घटना के दिन जिला मुख्यालय में होते तो आज तक इस घटना का खुलासा हो गया रहता। एसपी के छुट्टी पर होने के कारण मोनिटरिंग का घोर अभाव देखने को मिल रहा था।

पुलिस का लोकल नेटवर्क टूटा :
सूत्रों का तो यह भी कहना है कि पुराने पुलिस अधिकारियों का जिले से एकसाथ तबादला हो जाने के कारण पुलिस का पूरा सूचनातंत्र बिखर चुका है। इस घटना में मिल रही नाकामी से साफ लग रहा है कि समस्तीपुर पुलिस के पास अपना कोई गुप्तचर नहीं है, जो उन्हें लोकल बदमाशों की सटीक जानकारी दे सके।

पहचान का दावा लेकिन गिरफ्तारी नहीं :
पुलिस सूत्रों की मानें तो पुलिस सिर्फ तकनीकी अनुसंधान पर ही टिकी हुई है, लेकिन इस घटना में बदमाशों ने मोबाइल का प्रयोग नहीं करके पुलिस के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। वैसे घटना के पहले दिन से ही पुलिस के वरीय अधिकारी मीडिया के सामने गिरोह की पहचान कर लेने का दावा कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि 22 दिन बाद भी पुलिस रिलायंस ज्वेल्स लूटने वाले किसी बदमाश की पहचान नहीं कर पायी है।

नेपाल, बंगाल, झारखंड, यूपी हर तरफ हुई छापामारी :
रिलायंस ज्वेल्स डकैती कांड के बाद जांच में जुटी स्थानीय पुलिस की एसआइटी, एसटीएफ एवं पड़ोसी जिलों की पुलिस टीम संदिग्धों की टोह में बिहार के वैशाली, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, पटना, बेगूसराय एवं दरभंगा के साथ साथ नेपाल, बंगाल, झारखंड, यूपी हर तरफ छापेमारी कर चुकी है। लेकिन पुलिस सूत्रों की मानें तो अभी तक पुलिस को कोई खास सुराग हाथ नहीं लगा है। इतना ही नहीं इस घटना में शामिल किसी भी अपराधी की पहचान तक नहीं हो पायी है। सिर्फ आशंका पर पुलिस काम कर रही है। बताया जाता है कि पुलिस की टीम ने कई दिनों तक पश्चिम बंगाल एवं नेपाल से जुड़े सीमावर्ती इलाकों में दबिश बनायी। इस दौरान कई होटलों एवं संभावित ठिकानों पर छापेमारी भी की, लेकिन उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिली।

28 फरवरी को रिलायंस से हुई थी करोड़ों की लूट :
यहां बता दें कि मुफस्सिल एवं नगर थाना के सीमा पर स्थित रिलायंस ज्वेल्स में 28 फरवरी की शाम करीब 7:45 बजे डकैती की यह घटना हुई थी। आठ की संख्या में पहुंचे लूटेरों ने गार्ड के साथ सभी कर्मचारियों को बंधक बना कर इस घटना को अंजाम दिया था। इस दौरान बदमाशों ने उक्त ज्वेलरी शोरूम से करीब 10 किलो से अधिक ज्वेलरी बड़े-बड़े दो झोलों में भरकर ले गए थे। एफआईआर के अनुसार लूटी गयी ज्वेलरी की कीमत साढ़े छह करोड़ रुपए है। लेकिन सूत्रों की मानें तो लूटी गयी ज्वेलरी की कीमत कई करोड़ अधिक हो सकती है। इतनी बड़ी रकम की लूट या डकैती समस्तीपुर में आजतक कभी नहीं हुई थी। यह जिले के लिए सबसे बड़ी डकैती बतायी जा रही है। जिसका उदभेदन करने में पुलिस नाकाम साबित हो रही है।













