फर्जी अस्पतालों में मरीज के जान से हो रहा खिलवाड़, लगातार हो रही घटनाओं के बाद भी जिला प्रशासन बेखबर


मिथिला पब्लिक न्यूज, कमलेश झा ।
समस्तीपुर में फर्जी अस्पतालों की भरमार है। डॉक्टरों के फर्जी नाम पर अस्पताल को खोला जा रहा है। जहां मरीज के जान से खिलवाड़ हो रहा है। आये दिन गलत ऑपरेशन और इलाज से मरीजों की जान जा रही है। शनिवार की सुबह मुसरीघरारी थाना क्षेत्र में इसी तरह के एक मामले में एक महिला की मौत हो गई। बताया जाता है कि उदाजागीर मोहल्ले में संचालित अनिशा हेल्थ केयर नामक एक निजी नर्सिंग होम में ईलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया था। जिसके बाद उसके परिजनों ने उक्त निजि नर्सिंग होम के बाहर जमकर हंगामा भी किया था।

रोज हो रही घटनाएं पर जिला प्रशासन बेखबर :

लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद भी जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग इस सबसे बेखबर है। स्वास्थ्य विभाग फर्जी चिकित्सक एवं उनके अस्पताल पर कार्रवाई के नाम पर बस खानापूरी कर रही है। जिले में सैकड़ों अवैध नर्सिंग होम संचालित किये जा रहे हैं। जहां गलत तरीके से इलाज के कारण अक्सर मरीजों की मौत हो रही है, लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

चर्चित डॉक्टरों के नाम पर मरीजों को ठगा जा रहा :

कुछ तो ऐसे अस्पताल भी हैं जिन्हें जेन्युन डॉक्टर के नाम पर संचालित किया जा रहा है। लेकिन जिस डॉक्टर के नाम से संचालित किया जाता है, उन्हें अपने क्लीनिक से फुरसत नहीं मिलती, जिस कारण से वे उस अस्पताल में उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। जिस कारण से उन अस्पतालों में भी मरीजों का सही तरीके से इलाज नहीं हो पाता है। वहां भी चर्चित डॉक्टरों के नाम पर मरीजों को ठगा जा रहा है।

कार्रवाई के नाम पर बस हुई खानापूरी :

पूर्व में दलसिंहसराय, ताजपुर, खानपुर, कल्याणपुर, रोसड़ा सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा चुकी है। कई स्थानों पर फर्जी अस्पतालों पर केस दर्ज होने के बाद भी उनका नाम बदलकर या स्थान परिवर्तन कर संचालन किया जा रहा है। पूरा समस्तीपुर इस बात को जान रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को इसकी खबर तक नहीं है।

कंपाउंडर, ड्राइवर व दुकानदार चलाते हैं अस्पताल :

जानकार बताते हैं कि जिले में फर्जी डॉक्टर एवं अस्पतालों की भरमार है। यहां कंपाउंडर, ड्रेसर, सरकारी अस्पतालों के कर्मी एवं उनके संबधी, दवा दुकानदार, किराना दुकानदार एवं एम्बुलेंस चालकों ने अपना अस्पताल खोल रखा है। जिनपर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही है। वैसे तो इन अस्पतालों के बड़े-बड़े बोर्ड पर कई डॉक्टरों के फर्जी नाम लिखे होते हैं, लेकिन वहां मरीजों का इलाज झोला छाप कंपाउंडर के द्वारा ही किया जाता है। उन अस्पतालों में ना तो डॉक्टर होते हैं और ना ही मानक के अनुसार इलाज की समुचित व्यवस्था ही होती है।

बड़ी बिल्डिंग व बैनर पोस्टर को देख फंस रहे मरीज :

अस्पताल की बड़ी बड़ी बिल्डिंग, सजावट, डॉक्टर का नाम एवं अत्याधुनिक सुविधाओं की जानकारी लिखे बैनर पोस्टर को देख मरीज उन अस्पतालों में पहुंच जाते हैं। जहां वे मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक शोषण के शिकार हो जाते हैं। कई बार इन अस्पतालों में मरीजों की जान भी चली जाती है। लेकिन उन घटनाओं को रफादफा कर दिया जाता है। कुछ घटनाओं की शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद कई बार कार्रवाई का आदेश भी हुआ। जांच भी हुई। कई अस्पतालों में फर्जीवाड़ा सामने भी आया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर बस खानापूरी ही की गई है।

डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों के मिलीभगत से चलता है फर्जी अस्पताल :

आज भी जिला मुख्यालय में करीब आधा दर्जन से अधिक ऐसे अस्पतालों के संचालन किया जा रहा है। जिसे जिला प्रशासन के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया था। लेकिन उन अस्पतालों के संचालकों पर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। जिसका नतीजा है कि सील किये गए सभी अस्पतालों को नाम बदल कर फिर से चालू कर दिया गया है। आश्चर्य तो इस बात का है कि इन सभी फर्जी अस्पतालों का संचालन सरकारी अस्पताल में पदस्थापित डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों के मिलीभगत से किया जा रहा है। उनके बोर्ड पर सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों का नाम लिखा होता है।

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