समस्तीपुर में भाड़े के डॉक्टरों के भरोसे चल रहे हैं निजी अस्पताल, मात्र 125 रजिस्टर्ड लेकिन सैकड़ों का हो रहा संचालन

मिथिला पब्लिक न्यूज, कमलेश झा ।
समस्तीपुर में मात्र 125 निजी अस्पताल न्यू क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हैं, लेकिन संचालन सैकड़ों निजी अस्पताल का किया जा रहा है। दर्जनों नर्सिंग होम एवं इमरजेंसी हॉस्पीटल में कोई डॉक्टर नहीं है। ऐसे अस्पताल फर्जी कागजात, भाड़े के डॉक्टरों एवं उनके किराये के डिग्री के भरोसे ही चलाये जा रहे हैं। इसमें कई ऐसे अस्पताल भी हैं जो न्यू क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हैं। अगर जिला प्रशासन इसका सही तरीके से जांच करे तो कई रजिस्टर्ड अस्पताल में भी ताला लटक सकता है।

एक तरफ जहां जिला प्रशासन ने इसको लेकर मौन धारण कर रखा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करने में जुटी है। फर्जी कागजातों पर संचालित हो रहे ऐसे अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा देने के नाम पर मरीजों के साथ सिर्फ लूट-खसोट ही किया जाता है। जिस वजह से कभी कभी मरीज की जान पर भी बन आती है। स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी का किस तरह से इलाज करती है वह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन जबतक इन अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं होती तबतक आमलोगों को स्वंय सचेत रहने की जरूरत है।

कंपाउंडर व एम्बुलेंस चालकों ने खोल रखा है अस्पताल :
जानकार सूत्रों के अनुसार जिले में कंपाउंडर, ड्रेसर, दवा दुकानदार एवं एम्बुलेंस चालकों ने अस्पताल खोल रखा है। इन अस्पतालों के बड़े बड़े बोर्ड पर कई डॉक्टरों के नाम लिखे होते हैं, लेकिन वहां मरीजों का इलाज झोला छाप कंपाउंडर के द्वारा ही किया जाता है। उन अस्पतालों में ना तो डॉक्टर होते हैं और ना ही मानक के अनुसार इलाज की समुचित व्यवस्था ही होती है। अस्पताल की बड़ी बड़ी बिल्डिंग, सजावट, डॉक्टर का नाम एवं अत्याधुनिक सुविधाओं की जानकारी लिखे बैनर पोस्टर को देख मरीज उन अस्पतालों में पहुंच जाते हैं। जहां वे मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक शोषण के शिकार हो जाते हैं।

न्यू क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत निबंधित अस्पताल :

मिथिला आँख अस्पताल मुसरीघरारी, डॉ सीबीपी वर्मा मेमोरियल विभूतिपुर, माता चन्द्रकला ट्रामा एवं डेन्टल सेन्टर समस्तीपुर, जीवन सहारा हॉस्पीटल ताजपुर, श्री नारायणा इमरजेंसी समस्तीपुर, खुशी हॉस्पीटल दलसिंहसराय, माँ घूमावती हॉस्पीटल समस्तीपुर, आदर्श हॉस्पीटल रोसड़ा, साक्षी हॉस्पीटल दलसिंहसराय, संवेदना हॉस्पीटल समस्तीपुर, नंदा पाली क्लिनिल समस्तीपुर, जीवन हॉस्पीटल मुसरीघरारी, सुरक्षा हॉस्पीटल वारिसनगर, लाईफ केयर हॉस्पीटल समस्तीपुर, पुअर नर्सिंग हाम समस्तीपुर, आरबी हॉस्पीटल समस्तीपुर,


श्री हॉस्पीटल दलसिंहसराय, जीवन सहारा हॉस्पीटल मुसरीघरारी, कमला इमरजेंसी हॉस्पीटल समस्तीपुर,
पुष्पलता देवी चिल्ड्रेन हॉस्पीटल समस्तीपुर, शिवांगी नर्सिंग होम समस्तीपुर, होप हॉस्पीटल समस्तीपुर, समस्तीपुर आँख अस्पताल समस्तीपुर, जेएस हॉस्पीटल समस्तीपुर, साई शिवम हॉस्पीटल समस्तीपुर, श्याम शिशु सदन समस्तीपुर, जनता हॉस्पीटल समस्तीपुर, एसआरएस डायबिटीज स्पेशलिटी केयर समस्तीपुर, डॉ आरपी मिश्रा हॉस्पीटल समस्तीपुर, अदिति आँख अस्पताल समस्तीपुर,
माँ नर्सिंग होम समस्तीपुर, शिवम न्यूरो केयर हॉस्पीटल शिवाजीनगर, बाबा हॉस्पीटल दलसिंहसराय, गेटवेल हॉस्पीटल दलसिंहसराय, कृष्णा हॉस्पीटल समस्तीपुर,
डॉ मुखर्जी क्लिनिक समस्तीपुर, सुनिता मातृ सेवा सदन क्लिनिक, अपोलो डेन्टल क्लिनिक समस्तीपुर, मुस्कान सेवा सदन मोहिउद्दीननगर, सी मैक्स हॉस्पीटल समस्तीपुर, लोक शान्ति हॉस्पीटल उजियारपुर, हैप्पी हेल्थ केयर सेंटर रोसड़ा,

प्रभात हॉस्पीटल समस्तीपुर, योगमाया आरोग्य सेवा सदन समस्तीपुर, एमआर हॉस्पीटल समस्तीपुर, जय माँ भगवती आयुर्वेद औषधालय दलसिंहसराय, आरोही हड़ी अस्पताल दलसिंहसराय, शर्मा हॉस्पीटल रोसड़ा, शिव सेवा इमरजेंसी हॉस्पीटल दलसिंहसराय, बालाजी हॉस्पीटल पटोरी, बिहार नर्सिंग होम समस्तीपुर, वैष्णवी मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पीटल समस्तीपुर, लीडर हॉस्पीटल मुसरीघरारी, सुशीला हॉस्पीटल समस्तीपुर, आशुतोष क्लिनिक दलसिंहसराय, संजीवनी हॉस्पीटल समस्तीपुर, लखोटिया क्लिनिक रोसड़ा, गंगा हॉस्पीटल दलसिंहसराय, डॉ शोभा सिन्हा मेमोरियल हॉस्पीटल समस्तीपुर, आदित्या हॉस्पीटल समस्तीपुर, स्नेहा मातृ शिशु सेवा सदन दलसिंहसराय,
स्ओन लेजर यूरालॉजी सेन्टर समस्तीपुर, महावीर मेमोरियल अस्पताल समस्तीपुर, ऑक्सीजन हॉस्पीटल दलसिंहसराय, अखण्ड ज्योति आई हॉस्पीटल दलसिंहसराय, एसआर नर्सिंग होम समस्तीपुर, हेल्थ होम रोसड़ा सहित 125 निजी अस्पताल निबंधित हैं।
( नोट : अस्पतालों के नाम जानकारी के आधार पर है, इनमें कुछ अस्पताल के नाम में बदलाव या विसंगतियां सम्भव है। इसे आधिकारिक लिस्ट न समझें। )

नर्सिंग होम के लिए लाइसेंस है जरूरी :
राज्य में क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत नर्सिंग होम संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग से लाइसेंस लेना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक वर्ष के लिए उन्हें निबंधित किया जाता है। इसके बाद उन्हें हर वर्ष अपना निबंधन रिनुअल भी कराना होता है। इस एक्ट के तहत निजी अस्पताल, प्रसव केंद्र, नर्सिंग होम, क्लीनिक आदि चलाने के लिए वहां मानक के अनुसार मरीजों को सुविधाएं एवं सेवाएं मुहैया करानी होती है। लेकिन जानकार सूत्र बताते हैं कि जिले में तीन सौ से अधिक ऐसे क्लीनिक, अस्पताल, नर्सिंग होम का संचालन किया जा रहा है लेकिन निबंधित अस्पतालों की संख्या मात्र 125 है।

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