

मिथिला पब्लिक न्यूज, कमलेश झा ।
समस्तीपुर की बेटियां भी हर क्षेत्र में अपने जिले का नाम रौशन कर रही हैं। खासकर हिंदी साहित्य, कला और गीत-संगीत के क्षेत्र में उन्होंने जिले का खूब मान बढ़ाया है। आज हम आपको एक ऐसी ही बेटी से रूबरू करा रहे हैं, जो छंदकार और गीतकार के रूप में राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बना रही हैं। ये हैं खानपुर प्रखंड के भोरेशाहपुर गांव की अर्चना झा।

अर्चना झा उर्फ अर्चना झा ‘सरित’ को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल डॉ ममता सैनी की किताब “आयुर्वेद को जानें” में पलाश पर 55 दोहे लिखने के लिए ‘आयुष कृति अलंकरण’ एवं “भारत को जानें” में बिहार पर गीत लेखन के लिए ‘भारत कृति अलंकरण’ सम्मान से सम्मानित किया गया है। मिथिला पब्लिक न्यूज से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि इसी महीने 11 मई को नई दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन हॉल में अंतर्राष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच तंजानिया द्वारा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था।

इस समारोह में सर्वप्रथम डॉ ममता सैनी द्वारा संपादित दो ग्रन्थ “भारत को जानें” एवं “आयुर्वेद को जानें” का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर पहुंचे देश के जाने माने कवि पद्मश्री अशोक चक्रधर एवं सुप्रसिद्ध हास्य कवि पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने आयुर्वेद पर उनकी रचनाओं के लिए ‘आयुष कृति अलंकरण’ सम्मान एवं “भारत को जानें” में बिहार पर गीत लेखन के लिए ‘भारत कृति अलंकरण’ सम्मान से से सम्मानित किया।

यहां बता दें कि अर्चना छंदकार और गीतकार के रूप में जानी जाती हैं। उनकी 35 से अधिक साझा संग्रह में सहभागिता रही है। वर्तमान में वह राष्ट्रीय काव्य संग्रह मंच की सह सचिव भी हैं। उत्तराखंड के देहरादून में उन्हें उनकी रचनाओं एवं प्रस्तुति के लिए ‘अटल कवि परिवार’ ने सम्मानित किया है। साथ ही राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था ‘साहित्य सागर’ की ओर से वर्ष 2020 में ‘साहित्य सागर शिरोमणि सम्मान से विभूषित किया गया है। मार्च महीने में उन्हें ‘सहित्योदय’ द्वारा शिवायन अखण्ड काव्यार्चन में उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए “शिवशक्ति” सम्मान से भी विभूषित किया गया है।

अर्चना मूल रूप से खानपुर प्रखंड के भोरेशाहपुर गांव निवासी स्वर्गीय सत्यदेव झा की पुत्री हैं। वर्तमान में वह अपने पति दरभंगा के आधारपुर निवासी सुशील कुमार झा के साथ उत्तराखंड के देहरादून में रहती हैं। उनके पति पीएनबी के चीफ मैनेजर हैं। अर्चना के अनुसार उन्हें इस मुकाम को हासिल करने में परिवार का भी अतुलनीय सहयोग मिला है।















