

मिथिला पब्लिक न्यूज, कमलेश झा ।
समस्तीपुर में लिपिक एवं एएनएम का अवैध रूप से संविदा विस्तार करने के मामले को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लिया है। स्वास्थ्य विभाग में की गयी इस गड़बड़ी में लिप्त कर्मियों जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने निलंबित करने का आदेश दिया है। साथ ही साथ उनपर प्रपत्र ‘क’ गठित कर इसकी रिपोर्ट देने का भी आदेश दिया गया है।

मंगलवार को जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने इसको लेकर समस्तीपुर सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी को पत्र भी जारी कर दिया है। जिसमें कहा गया है कि सिविल सर्जन कार्यालय से 19 फरवरी 2024 को संविदा लिपिक रामनंदन रजक एवं रमेश प्रसाद का सेवाविस्तार के लिए प्रस्ताव जिला स्थापना प्रशाखा को भेजा गया। इसके अतिरिक्त 29 दिसम्बर 2023 को फार्मासिस्ट जनार्दन प्रसाद सिंह के द्वारा एएनएम किरण कुमारी, 30 जनवरी 2024 को एएनएम इन्द्रा कुमारी तथा इन्द्रासन कुमारी का संविदा नियोजन हेतु अनुशंसा के साथ अनुरोध किया गया था।

इस सम्बंध में विस्तृत जाँच कराने पर पाया गया कि एएनएम का पद राज्य स्तरीय रहने के कारण जिला स्तरीय गठित समिति में विचार योग्य नहीं था। इतना ही नहीं सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प संख्या 11651 में स्वास्थ्य विभाग में पदस्थापित लिपिकों का संविदा विस्तार किया जाय अथवा नहीं इसका भी स्पष्ट उल्लेख नही किया गया है। लेकिन उक्त विभागीय निर्देश की अवहेलना करते हुए जिलाधिकारी को संविदा नियोजित/विस्तार हेतु प्रस्ताव भेजा गया।

जो कहीं से भी क्षम्य नहीं है। इस संबंध में गोपनीय प्रशाखा के द्वारा उक्त प्रस्ताव को तैयार करने में संलिप्त कर्मियों से स्पष्टीकरण की मांग की गई थी। जिसका समर्पित स्पष्टीकरण संतोषप्रद नहीं पाया गया। जिसके बाद जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को संविदा विस्तार का गलत प्रस्ताव भेजने वाले कर्मी के विरूद्ध निलम्बन की कार्रवाई करते हुए प्रपत्र “क” गठित करने का आदेश दिया है।

यहां बता दें कि इस प्रकरण में विभागीय निर्देशों की अनदेखी कर संविदा अवधि विस्तार करने का प्रस्ताव समर्पित करने वाले पांच कर्मियों से जवाब तलब किया था। जिसमें सहायक प्रशासी पदाधिकारी मो. नौशाद अहमद, जिला स्थापना प्रशाखा के प्रधान लिपिक राम सेवक महतो, सदर अस्पताल के उच्च वर्गीय लिपिक अभिषेक कुमार, स्थापना प्रशाखा के निम्न वर्गीय लिपिक अभिषेक कुमार सिंह एवं सदर अस्पताल के संविदा लिपिक रमेश प्रसाद शामिल थे।

बताया जाता है कि गोपगुट महासंघ के जिला सचिव अजय कुमार ने जिलाधिकारी से इस मामले की शिकायत की थी। शिकायत के बाद आपदा एडीएम राजेश कुमार सिंह के द्वारा किए गए जांच के दौरान संविदा विस्तार व नियोजन को अवैध पाया गया था। जांच में पाया गया था कि विभाग के जिस निर्देश का हवाला दिया गया, उक्त अनुसूची में स्वास्थ्य विभाग के लिपिक का उल्लेख ही नहीं है। जिस वजह से उक्त शर्तें लिपिक के संविदा विस्तार पर प्रभावी नहीं माना जायेगा। इसमें केवल एक वर्ष के लिए ही संविदा नियोजन किया जाना था।

संविदा लिपिक रमेश प्रसाद एवं राम नंदन कुमार रजक को पूर्व में एक वर्ष के लिए नियोजन किया जा चुका था, तो फिर जिला चयन समिति की बैठक में संविदा अवधि विस्तार किया जाना विधि सम्मत नहीं था। जिला चयन समिति के द्वारा सीएस के अनुशंसा के आलोक में एएनएम कर्मियों का संविदा नियोजन किया गया। यह अवधि विस्तार पूर्व की तरह जिला स्तरीय गठित समिति के द्वारा किया गया। परंतु स्वास्थ्य निदेशालय के निर्देश के आलोक में एएनएम का पद अब राज्य स्तरीय हो चुका है। इसमें एएनम के संविदा नियोजन हेतु सामान्य प्रशासन के अधीन गठित समिति का अनुशंसा प्राप्त किया जाना होता है। इसलिए एएनएम का किया गया संविदा नियोजन भी विधि सम्मत नहीं था।













