


मिथिला पब्लिक न्यूज, कमलेश झा ।
समस्तीपुर के लोगों के लिए अच्छी खबर है। उत्कृष्ट स्वास्थ्य सुविधा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। अब समस्तीपुर में भी अत्याधुनिक तकनीक से नसों की जांच (नर्व कंडक्शन वेलोसिटी टेस्ट) शुरू हो गया है। इस जांच की व्यवस्था समस्तीपुर के मोहनपुर रोड स्थित उज्जीवन बैंक के नीचे रिलीफ पॉइंट की शाखा ” The Stimulus ” में की गयी है। जहां शहर के जाने माने फिजियोथेरेपिस्ट डॉ वीपी निर्मल के द्वारा जांच किया जा रहा है।

” The Stimulus ” में नस संबंधित बीमारियों के लिए अत्याधुनिक तकनीक से नसों की जांच की जाती है। अगर किसी नस की बीमारी की वजह से किसी व्यक्ति की हाथ और पैर में कमजोरी आ रही है। हाथ या पैर ठीक से काम नहीं कर रहा है तो उसकी जांच करवा कर बीमारी का इलाज सही रूप से करवाया जा सकता है। पहले इस जांच के लिए लोगों को पटना जैसे शहरों में जाना पड़ता था। लेकिन अब अपने शहर के लोगों के लिए यह विशेष नस की जांच की सुविधा पहली बार उपलब्ध हुई है। अब लोगों को बड़े शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डॉ वीपी निर्मल बताते हैं कि इस जांच को नर्व कंडक्शन वेलोसिटी टेस्ट कहा जाता है। जिसमें नसों की कार्यशैली को चेक किया जाता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नस कितना काम कर रहा है।

नर्व कंडक्शन वेलोसिटी (एनसीवी) टेस्ट क्या है?
डॉ निर्मल बताते हैं कि एनसीवी टेस्ट नसों में संवेगों की गति की जांच करता है। इन संवेगों की गति के आधार पर डॉक्टर यह पता लगा लेते हैं, कि नसों में कितनी क्षति हुई है। नसें लंबी रेशे (फाइबर) की तरह होती हैं, जो कि पूरे शरीर में फैली हुई हैं। ये मस्तिष्क से जानकारी को पूरे शरीर तक पहुंचाती हैं। शरीर के ठीक प्रकार से कार्य करने के लिए यह जरूरी है कि नसें ठीक तरह कार्य करें ताकि जो भी जानकारी शरीर में पहुंचाई जाए वो पूरी तरह सही हो। यदि नसों में किसी प्रकार की क्षति होती है, तो उससे उनकी जानकारी पहुंचाने की गति भी प्रभावित हो जाती है। कुछ विकारों के कारण नसों की कार्य प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है जिससे नसों के संदेश पहुंचाने (कंडक्शन) की गति में भी बदलाव आ जाता है।

एनसीवी टेस्ट किसलिए किया जाता है?
1. पैरों में झुनझुनी महसूस होने या पैरों में कमजोरी होने पर
2. टांगों के निचले भाग या पैर की मांसपेशियों में कमजोरी होने पर
3. उंगलियों में दर्द या सुन्न हो जाने पर
4. तेज दर्द, पैरों से लेकर कूल्हों तक झुनझुनी या सुन्न होने की स्थिति में
5. गर्दन से लेकर कन्धों तक झुनझुनी या सुन्न होने की स्थिति में
6. शरीर के किसी और भाग में कमजोरी, दर्द, झुनझुनी महसूस होने पर















