

मिथिला पब्लिक न्यूज, कमलेश झा ।
मरीजों के लिए एक बुरी खबर है। प्रशासनिक अनदेखी से तंग आकर अब रक्तदान शिविर लगाने से सामाजिक संस्थाओं ने हाथ खड़े कर दिए हैं। जिस वजह से पूर्व से ही रक्त की कमी झेल रही ब्लड बैंक की स्थिति और चरमरा जायेगी। ब्लड बैंकों में ब्लड की भारी किल्लत हो जायेगी। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ेगा।

सनातन रक्तदान समूह के संस्थापक अविनाश कुमार बादल ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि बिहार के लगभग सभी सामाजिक संगठन जो रक्तदान के क्षेत्र में कार्य करतें हैं उन्होंने विभिन्न समस्याओं से त्रस्त होकर यह निर्णय लिया है। राज्य में रक्तदान कार्य को लेकर सरकार और संबंधित पदाधिकारियों का इसपर कोई ध्यान नहीं है। रक्तकेंद्र अपनी मनमानी करतें हैं। पारदर्शिता की बहुत कमी है,और रक्तदान कराने वाली संस्थाओं को जिलाधिकारी या सक्षम पदाधिकारी से किसी प्रकार का समन्वय नहीं मिलता है। ना ही उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है, और ना ही इस कार्य में क्या दिक्कतें आ रही हैं इसको जानने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकारी स्तर पर कैसे रक्तदान को बढ़ाया जा सके इस ओर तो कोई प्रयास ही नहीं किया जाता है। इन्ही कारणों से आज संगठन को ये कदम उठाना पड़ा। रक्तदान करने वाले विभिन्न संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री के साथ साथ सम्बंधित जिलाधिकारी एवं ब्लड बैंक प्रभारियों को अपनी मांगों से सम्बंधित एक विज्ञप्ति भी सौंपी है। जिसके माध्यम से मांग किया गया है कि हर जिले में कंपोनेंट मशीन लगे ताकि अधिक मरीजों को रक्त उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही रक्तदान शिविर लगाने के लिए सरकारी स्तर पर मदद मिले। रक्तदान करने वाले रक्तदाताओं के लिए उचित और स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थ, मिढ़ाई आदि की व्यवस्था की जाए। साथ ही एक ऐसा डोनर कार्ड जारी हो जो पूरे बिहार के किसी भी सरकारी या निजी और अर्धसरकारी रक्तकेंद्र में देकर रक्तदान करने वालों के परिवार या रक्तदाता के अनुसंशा पर अन्य किसी जरूरत मंद को समय पर रक्त मिल सके।

संगठनों ने कहा है कि बिहार में बहुत से ऐसे अस्पताल हैं जो अपने अस्पताल के ब्लड बैंक के अलावा किसी दूसरे अनुज्ञप्तिप्राप्त ब्लड बैंक का रक्त लेने से साफ मना करतें हैं। इतना ही नहीं वे अपने ही ब्लड बैंक में रक्तदान करने का दवाब भी बनाते हैं, जिससे मरीजों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। संगठनों ने ऐसे अस्पताल और रक्त केंद्र पर कार्रवाई की मांग की है। रक्तकेंद्र में व्याप्त असुविधाओं को ठीक करने के साथ साथ रक्त के रख रखाव, और शिविर में आने वाले या स्वेक्षा से किये गए रक्तदान और रिप्लेसमेंट से आने और जाने वाले रक्त का पूरा और पक्का ब्योरा हो।

ऐसा नियम बने कि हर जिला में रक्तदान के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं से स्थानीय प्रशासनिक पदाधिकारी संपर्क बनाए ताकि रक्तदान के कार्य को और भी बढ़ाया जा सके। इन मांगों को लेकर सामाजिक संस्थाओं के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने मिलकर ज्ञापन सौंपा है। समस्तीपुर में सनातन रक्तदान समूह के संजीव रंजन, दीपक सिंह चौहान, ब्लड फोर्स टीम से राहुल श्रीवास्तव, ग्रामीण रक्तदान संघ के कृष्णा कुमार, एक पहल फ़ाउंडेशन ट्रस्ट के रोहन तनेजा आदि ने सामूहिक रूप से रक्तदान और रक्त केंद्र में व्याप्त समस्या में सुधार करने के लिए शुक्रवार को जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह, सीएस डॉ एसके चौधरी एवं सदर अस्पताल के डीएस डॉ गिरीश कुमार के साथ साथ विधायक अखतरूल इस्लाम शाहीन, राजेश सिंह एडीएम (आपदा ) एवं भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव वीडी केशव को अपना मांग पत्र सौंपा है।

अविनाश कुमार बादल ने कहा कि ऐसा प्रयास बिहार के सभी जिलों में किया जा रहा है। ताकि रक्तदान के कार्य को पारदर्शिता के साथ करते हुए स्वेक्षिक रक्तदान को बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि जल्द ही पटना में एक राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक भी बुलायी जायेगी। जिसके बाद सरकार के द्वारा लिए गए निर्णय और सुधार को देखते हुए आगे रक्तदान शिविर लगाया जाए इसपर निर्णय लिया जाएगा। जबतक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता तबतक रक्तदान शिविर का आयोजन इन संगठनों द्वारा नहीं किया जायेगा।













