

मिथिला पब्लिक न्यूज, कमलेश झा ।
समस्तीपुर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी के वेतन पर रोक लगा दी है। संविदा विस्तार मामले में संलिप्त कर्मी को बचाने पर यह कार्रवाई की गयी है। साथ ही डीएम ने सिविल सर्जन को तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण का जवाब देने का भी आदेश दिया है। बुधवार को हुई इस कार्रवाई से एक बार फिर संविदा विस्तार का मामला चर्चा में आ गया है।

बुधवार को जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह द्वारा समस्तीपुर सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी को जारी किये गए कारणपृच्छा नोटिस में कहा गया है कि उनके (सीएस) द्वारा दोषी कर्मी को बचाने के उद्देश्य से भ्रामक प्रतिवेदन देकर अद्योहस्ताक्षरी (डीएम) को गुमराह किया जा रहा है। सिविल सर्जन से पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर स्पष्टीकरण समर्पित करने को कहा गया है। जिसमें पूछा गया है कि किस परिस्थिति में अद्योहस्ताक्षरी (डीएम) के आदेश का अनुपालन नहीं कर भ्रामक प्रतिवेदिन देकर उन्हें गुमराह करने का प्रयास किया गया। डीएम ने स्पष्टीकरण के निस्तार होने तक सीएस का वेतन भुगतान स्थगित करने का आदेश दिया है।

नोटिस के अनुसार सेवानिवृत सरकारी सेवकों की संविदा पर नियोजन/संविदा विस्तार हेतु गलत प्रस्ताव तैयार कर भेजने वाले कर्मियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई करते हुए प्रपत्र “क” में आरोप पत्र गठित करने का सिविल सर्जन को निर्देश दिया गया था। लेकिन सिविल सर्जन के द्वारा उक्त निर्देश का अनुपालन नहीं किया गया। उक्त कर्मी पर कार्रवाई करने के बजाय उसे बचाने का प्रयास किया गया। इसके लिए सिविल सर्जन ने स्वयं एक भ्रामक प्रतिवेदन सौंपा है। जिस तत्कालीन स्थापना उप समाहर्ता सुनीता सोनू को 21 फ़रवरी 2024 को यह प्रतिवेदन उपलब्ध कराने की बात कही है वह स्थापना उप समाहर्त्ता 13.02.2024 को ही अपना प्रभार सौप कर नव पदस्थापित स्थान पर चली गयी थी। इससे स्पष्ट हो गया है कि सिविल सर्जन के द्वारा दोषी कर्मी को बचाने के उद्देश्य से भ्रामक प्रतिवेदन देकर डीएम को भी गुमराह किया गया।

यहां बता दें कि अवैध रूप से संविदा विस्तार किये जाने के मामले की शिकायत को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लिया था। गोपगुट महासंघ के जिला सचिव अजय कुमार ने जिलाधिकारी से इस मामले की शिकायत की थी। शिकायत के बाद आपदा एडीएम राजेश कुमार सिंह के द्वारा किए गए जांच के दौरान संविदा विस्तार व नियोजन को अवैध पाया गया था।














