

मिथिला पब्लिक न्यूज, कमलेश झा ।
देश के प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर सह कथावाचक डॉ अनुरुद्धाचार्य जी महाराज ने शनिवार को श्रीमद भागवत कथा में कहा कि सत्य, चित्त व आनंद से ही भागवत की प्राप्ति होती। ईश्वर ही सत्य हैं बांकी सब झूठ और सपना है। भागवत कथा के श्रवण मात्र से जन्म मृत्यु से छुटकारा मिलता है और मोक्ष्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि जीते जी मोक्ष्य तभी प्राप्त होगा जब हम सेवा करेंगे। सबका सेवा करने वाला ही जीते जी मोक्ष्य को प्राप्त करता है। भागवत से ही भगवान मिलते हैं। भागवत सुनकर बड़े बड़े पापी तर गये।

डॉ अनुरुद्धाचार्य जी महाराज शनिवार की सुबह समस्तीपुर के सरायरंजन पहुंचे। जहां से सैकड़ों की संख्या में भक्तजनों ने वाहनों के काफिला के साथ महाराज का भव्य स्वागत किया। उदयपुर गांव में अनुरुद्धाचार्य महाराज के प्रवेश करते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। बाद में वे कथा पंडाल में पहुंचे। जहां आरती के साथ भागवत कथा का शुभारंभ किया। आरती के दौरान आयोजक मुकुंद झा एवं उनके सुपुत्र अमन झा अपने पूरे परिवार के साथ मौजूद थे। कथा के प्रथम दिन उन्होंने कर्म की परिभाषा दी। महाराज ने कहा कि जो कर्म करता है उसका ही भाग्य भी साथ देता है।

कर्म तीन प्रकार के होते हैं, क्रियमाण कर्म संचित कर्म और प्रारब्धय (भाग्य)। उन्होंने कहा भाग्य से बड़ा कर्म है, भाग्य कर्म के अधीन है इसलिए कर्म करोगे तो भाग्य भी मिलेगा। जो कर्म और जैसा कर्म करोगे उसी के अनुसार फल भी मिलेगा। महाराज ने धर्म और कर्म में अंतर भी समझाया। इसपर उन्होंने कई उदाहरण देते हुए समझाया कि कर्म धर्मयुक्त होना चाहिए। उन्होंने जन्म देने वाली मां की सबसे पहले पूजा करने को कहा। महाराज ने कहा कि मां की सेवा करो उसे प्रसन्न रखो उसकी पहले पूजा करो उसके बाद मिट्टी की प्रतिमा की पूजा करो। जन्म देने वाली कि पहले पूजा करोगे तो उसी से मां दुर्गा खुद प्रसन्न हो जायेंगी। उन्होंने कहा मैं वृंदावन में 288 मां की में सेवा करता हूँ। आप अपनी माँ की तो सेवा करो।

इसके उपरांत उन्होंने सुख क्या है इसकी भी परिभाषा दी। उन्होंने कहा सुख और दुख सिक्के के दो पहलू है। सुख को बुलाओगे तो दुख साथ में आएगा ही क्योंकि सुख का उल्टा दुख है, इसलिए आप आनंद को खोजिए उसका उल्टा कुछ नहीं। आनंद से सिर्फ परमानंद ही मिलता है। उन्होंने कहा कि मोक्ष धरती पर ही मिल सकता है, अगर व्यक्ति किसी का बुरा ना सोचे, सबकी अच्छाई के लिए सोचे, सदा प्रसन्न रहे, सब की सेवा करें सबका सम्मान करें तो धरती पर ही मोक्ष है।

कथा के साथ साथ भजन से पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया था। कथा के प्रथम दिन ही काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। बता दें कि पटना से समस्तीपुर पहुंचने पर उनका लोगों ने भव्य स्वागत किया। इस मौके पर पूरा सरायरंजन ही सड़क पर उतर गया था। लोगों ने गाजे-बाजे के साथ उनका स्वागत किया। अनिरुद्धाचार्य महाराज भी गाड़ी से बाहर निकालकर लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। बता दें कि सात दिनों तक कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी भागवत कहेंगे। इस कथा को सुनने के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ जुट रही है।














