मैं संसार में सम्मान पाने नहीं, सेवा करने आया हूँ : डॉ अनिरुद्धाचार्य

मिथिला पब्लिक न्यूज़, कमलेश झा ।

आचार्य ने भक्तों को सर्वे भवन्तु सुखिनः एवं बासुदेव कुटुम्बकम का सार समझाया
– श्रीमद भागवत कथा के श्रवण को उदयपुर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
– प्रतिदिन भंडारा में हजारों श्रद्धालुओं व संतों को कराया जाता भोजन

सरायरंजन के उदयपुर गांव में श्रीमद भागवत कथा के पांचवें दिन बुधवार को डॉ अनुरुद्धाचार्य जी महाराज ने भक्तों को सर्वे भवन्तु सुखिनः एवं बासुदेव कुटुम्बकम का सार समझाया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कथा के माध्यम से सामाजिक गुण एवं संस्कार पर विस्तृत रूप से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मैं संसार में सम्मान पाने नहीं बल्कि, सेवा करने आया हूँ। इसके उपरांत उन्होंने लोग सांसारिक बंधन से मुक्त कैसे हो इस पर विस्तृत रूप से वर्णन किया।

भागवत ही बंधनों से दिलायेगी मुक्ति :


अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि संसार में कोई बंधा हुआ नहीं है लेकिन हम ने मान लिया है कि हम सांसारिक बंधनों से बंधे हुए हैं। हमलोग शरीर से बंधे हुए नहीं है लेकिन मन से बंधे हुए हैं। इसके लिए उन्होंने धोबी और गदहे की कहानी सुनाई। इसके बाद कहा कि असली सुख संसार को पकड़ने में नहीं छोड़ने में है और यह तभी संभव हो सकता है जब आप भागवत से जुड़ेंगे। भागवत कथा ही है जिससे आप सांसारिक बंधन से मुक्त हो सकते हैं।

श्री राम के 5 कार्यों ने उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाया :


महाराज ने श्रीराम के उन पांच कार्यों को बताया जिससे वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाये। जिसमें पहला था कि राम ने मां बाप के आज्ञा का पालन किया, दूसरा उन्होंने परायी स्त्री को हमेशा माँ बहन बेटी के रूप में देखा, तीसरा जिसको वचन दिया उसको निभाया, मित्रता को बचायी रखी। इसका उदाहरण उन्होंने बाली वध का वर्णन करते हुए किया। चौथा श्री राम ने जात-पात से उठकर सबको गले लगाया और पांचवा रिश्ते को सबसे ऊपर रखा, रिश्ते के लिए राज्य का त्याग कर दिया। इन कार्यों ने ही श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाया। उन्होंने कहा कि रिश्तों में स्वार्थ नहीं समर्पण होना चाहिए।

जब तक शरीर है तबतक सेवा करो :


अनिरुद्धाचार्य ने लोगों से घमंड त्यागने की अपील की। कहा कि भगवान के सबसे नजदीक वही होता है जो छोटा होता है। इसलिए काम बड़े-बड़े करो लेकिन, अपने आपको हमेशा छोटा समझो इसी में फायदा है और तभी आप भगवान के करीब हो सकते हैं। उन्होंने कहा घमंड कभी नहीं करना चाहिए, एक दिन सबको एक मुट्ठी राख बनकर एक छोटे से घड़ा में समाना है। किसी का अपना कुछ नहीं होता है। इसलिए जबतक शरीर है तबतक दूसरे की मदद करो, सहारा दो और सेवा करो क्योंकि एक दिन तो मुट्ठी भर राख बनना ही है।

समाज को भटका रहा है बॉलीवुड :

नौजवानों को सफलता का सूत्र देते हुए कहा कि कभी दूसरों में बुराई मत खोजो, बुराई देखनी है तो खुद की देखो। दूसरों में सिर्फ अच्छाई देखो। भगवान की और दूसरे की अच्छाई देखो और उनसे सिख लो। कथा के दौरान महाराज के द्वारा गाये भजन “एक डोली चली एक अर्थी चली” के बोल पर पूरा कथा पंडाल झूम उठा था।

अनिरुद्धाचार्य ने माता सीता के बनवास जाने की कथा के मूल को समझाया, उन्होंने कहा कि उस समय भी सीता माता की सेवा संतों (महर्षि वाल्मीकि) ने किया था, आज भी माताओं की सेवा संत ही कर रहे हैं। जबकि इन संतों को बॉलीवुड के लोग फिल्मों में गलत भूमिका दिखा कर बदनाम करने पर तुले हुए हैं। उन्होंने श्रोताओं से फ़िल्म देखने के बजाय भागवत कथा का श्रवण करने को कहा। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड आपको गलत राह पर ले जा रहा है। महाराज ने कहा कि मैं बॉलीवुड को भी सुधारने का प्रयास कर रहा हूँ, मैं उनके कार्यक्रम में जाकर उन्हें भागवत सौंप रहा हूँ।

हर दिन होता भंडारा, भोजन करते हैं हजारों श्रद्धालु :


यहां बता दें कि उदयपुर निवासी मुकुंद झा के पुत्र युवा समाजसेवी अमन झा के द्वारा श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया गया है। जहां दूर-दराज से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने एवं भोजन की भी व्यवस्था की गई है। प्रतिदिन भंडारा का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु भोजन भी करते हैं। दुर्गा मेला में बच्चों के मनोरंजन की भी पूरी व्यवस्था की गई है। मेला में झूला, मौतकुआ एवं अन्य प्रकार के मनोरंजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के प्रबंध भी किए गए हैं। दर्जनों शौचालय का निर्माण कराया गया है। पेयजल आपूर्ति की व्यापक स्तर पर व्यवस्था की गई है। सुरक्षा को लेकर भी पुख्ता प्रबंध किए गये हैं। इस आयोजन को लेकर आसपास के दर्जनों गांवों में उत्सवी माहौल बना हुआ है।

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