मरीज की जिंदगी के लिए मौत से लड़ते हैं एनेस्थेसिस्ट, सर्जरी दिल की हो या दिमाग की उनके बिना सम्भव नहीं

मिथिला पब्लिक न्यूज़, कमलेश झा ।

विश्व एनेस्थेसिया दिवस के अवसर पर  विभिन्न अस्पतालों में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कई अस्पतालों में डॉक्टर्स एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने इस दिन को केक काटकर सेलिब्रेट किया। इस दौरान आदर्शनगर स्थित संजीवनी हॉस्पीटल एवं मोहनपुर रोड स्थित कमला इमरजेंसी हॉस्पीटल में भी विश्व एनेस्थीसिया दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। जहां चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने एक दूसरे को बधाई दी। संजीवनी हॉस्पीटल में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों ने कहा कि मरीज की जिंदगी के लिए एनेस्थेसिस्ट को मौत से लड़ना पड़ता है। सर्जरी दिल की हो या दिमाग की एनेस्थेसिस्ट के बिना सम्भव नहीं है।


संजीवनी हाॅस्पीटल में बुधवार की शाम आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए अस्पताल के एमडी डॉ. अजीत कुमार ने कहा कि एनेस्थीसिया दिवस विश्व में हर वर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिवस एनेस्थीसियोलोजी में हुई प्रगति का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है। रोगी के आराम, सुरक्षा और बेहतर सर्जिकल रिजल्ट सुनिश्चित करने में एनेस्थीसिया की बड़ी भूमिका है। इसका उद्देश्य कई मेडिकल प्रोसेस में एनेस्थीसिया के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ इस क्षेत्र में चल रही प्रगति को उजागर करना है। कैंसर के उपचार में भी एनेस्थीसिया की बड़ी भूमिका रहती है।

इस अवसर पर कमला इमरजेंसी हॉस्पीटल के निदेशक डॉ. राजेश कुमार झा ने चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को आइसीयू एवं क्रिटिकल केयर से जुड़ी विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। मौके पर डॉ. रजनीकांत, डॉ. राणा, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. रत्नेश कुमार, डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. अंकज, डॉ. भारतेंदु, डॉ. सैयद मिराज इमाम, डॉ. शशिकांत, डॉ. नितिन कुमार के साथ- साथ अस्पताल कर्मी बिट्टू कुमार सिंह, कुंदन यादव, छोटू कुमार, निशु कुमार, अभिमन्यु यादव व पंकज कुमार आदि मौजूद थे।


यहां बता दें कि कमला इमरजेंसी हॉस्पीटल की टीम ने काफी कम समय में अपने उत्कृष्ठ कार्य के बदौलत एक अलग पहचान बनायी है। आइसीयू एवं आकस्मिक सेवा को जिले में स्थापित कर इस टीम ने अबतक हजारों लोगों की जान भी बचायी है। गम्भीर मरीजों को वेंटिलेटर से सफलतापूर्वक वापस लाकर उन्हें नया जीवन दिया है। कमला इमरजेंसी हॉस्पीटल की डॉ प्रज्ञा बताती हैं कि सर्जरी दिल की हो या दिमाग की, छोटी हो या बड़ी, बिना एनेस्थेसिस्ट के यह सम्भव नहीं है।

एनेस्थीसिया एक ऐसी दवा है, जिसके जरिये बड़ा से बड़ा सर्जरी बिना किसी दर्द के मरीज झेल लेता है। खासकर सर्जरी में एनेस्थीसिया का विशेष महत्व है। सर्जरी में जितना परिश्रम एक सर्जन करता है, उसे सफल बनाने में उतना ही एक एनेस्थेसिस्ट की भूमिका रहती है। पहले सर्जरी करना आसान नहीं होता था। मरीज को ऑपरेशन के बाद होश में आने में कई घंटे लग जाते थे। लेकिन अब मरीज को सर्जरी के कुछ देर बाद ही होश आ जाता है। एनेस्थीसिया से चिकित्सा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुआ है।

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