सिपाही भर्ती परीक्षा में स्कूलों से हुई लाखों की वसूली, सेटिंग-गेटिंग की बहती गंगा में जिला व पुलिस प्रशासन के कुछ कर्मियों ने भी धोया हाथ

मिथिला पब्लिक न्यूज़, ब्यूरो रिपोर्ट ।

प्रश्नपत्र लीक होने के बाद वैसे तो केंद्रीय चयन पर्षद ने सिपाही भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया है. लेकिन इस परीक्षा के पूर्व और बाद में हुई कुछ घटनाओं ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है. जिसके जबाब को ढूंढने में इओयू लगी हुई है. सूत्रों की मानें तो सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर सिर्फ छपरा, भोजपुर एवं पटना में ही नहीं समस्तीपुर में भी सॉल्वर गैंग ने पूरी तैयारी कर रखी थी. यहां सिर्फ कदाचार कराने की ही तैयारी नहीं थी, बल्कि परीक्षा सेंटर आवंटन एवं सेंटर मैनेज का भी खेला हुआ था.

सॉल्वर गैंग से जुड़े लोग जिला मुख्यालय एवं आसपास के कई स्कूलों पर परीक्षा से पूर्व पहुंचकर सेंटर मैनेज करने की बात की थी. हालांकि कुछ स्कूलों ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया था, लेकिन कुछ स्कूल के संचालक गैंग के झांसे में आ गए थे. चर्चा यह भी है कि सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान सेटिंग-गेटिंग की बहती गंगा में शिक्षा विभाग के कर्मियों के साथ-साथ जिला एवं पुलिस प्रशासन के कुछ अधिकारी व कर्मियों ने भी अपना-अपना हाथ धो लिया है.

सूत्रों की मानें तो इस गोरखधंधे में सॉल्वर गैंग के करोड़ों रुपये कमाने के मंसूबों पर तो बिहार पुलिस ने पानी फेर दिया, लेकिन समस्तीपुर में परीक्षा के उपरांत कुछ स्कूलों के कमजोर नसों को पकड़कर मामले को रफा दफा करने के नाम पर लाखों रुपए की वसूली कर ली गयी. हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है वह तो जांच के बाद खुद ब खुद सामने आ जायेगी, लेकिन इस मामले के सामने आने के बाद से जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है.

लोग जिला पुलिस की कार्यशैली पर भी उंगली उठा रहे हैं. बताया जाता है कि समस्तीपुर में हुई सेटिंग गेटिंग की जानकारी सिपाही भर्ती परीक्षा की जांच कर रही इओयू तक को है. जो कभी भी जांच के लिए समस्तीपुर पहुंच सकती है. इओयू (आर्थिक अपराध इकाई) ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक टॉल फ्री नम्बर (0612-2216236) भी जारी किया है. साथ ही आम लोगों से अपील की है कि सिपाही भर्ती परीक्षा से संबंधित अगर किसी भी तरह की  जानकारी उन्हें हो तो वे इस टॉल फ्री नम्बर पर विभाग को दे सकते हैं. उनकी सूचना पूरी तरह से गोपनीय रखी जायेगी.



सेंटर आवंटन में भी है झोल :
जानकार सूत्रों की मानें तो जिले में होने वाली विभिन्न परीक्षाओं के लिए शिक्षा विभाग सेंटर का आवंटन करता है. इस प्रक्रिया में भी वर्षों से काफी झोलझाल चला आ रहा है. सूत्रों की मानें तो शिक्षा विभाग के कुछ कर्मी सेंटर आवंटन में भी ले-देकर स्कूलों का चयन करते हैं. मनमाफिक स्कूल में सेंटर सुपरिटेंडेंट की तैनाती के लिए भी सेटिंग की जाती है. पिछले कई सालों से कुछ चयनित स्कूलों में सेंटर सुपरिटेंडेंट का नहीं बदला जाना भी इसका प्रमाण है. साथ ही परीक्षा केंद्र में संबंधित स्कूलों के निजी शिक्षकों को सेंटर सुपरिटेंडेंट और वीक्षक बनाया जाना भी जांच का विषय है. इतना ही नहीं सूत्रों की मानें तो इस सिपाही भर्ती परीक्षा में सेंटरों पर तैनात कुछ पुलिसकर्मी को भी सॉल्वर गैंग ने अपना बना लिया था. जिन्हें किसी तरह इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को परीक्षा केंद्र में इंट्री की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी.



इओयू ने सभी जिलों से मांगी है रिपोर्ट :
ईओयू ने सभी जिलों के एसपी से इस परीक्षा को लेकर दर्ज की गयी कांडों की रिपोर्ट मांगी है. खासकर जिलों में जिन-जिन परीक्षा केंद्रों पर सिपाही भर्ती परीक्षा में नकल करते अभ्यर्थी पकड़े गए हैं या परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों के पास से कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त की गयी है, उन सभी मामलों में दर्ज केस को ईओयू ने मांगा है. सूत्रों के अनुसार समस्तीपुर में पांच केस दर्ज किये गये हैं. जिसमें दो परीक्षार्थियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया गया है. राज्य भर में कुल 67 केस दर्ज हुए हैं. इनमें दो दर्जन केस की जांच ईओयू ने शुरू कर दी है.



5 से 10 लाख रुपए का कर रखा था डील :
सॉल्वर गैंग से जुड़े शातिरों ने सिपाही भर्ती परीक्षा में करोड़ों रुपये कमाने की तैयारी कर रखा था. हर एक अभ्यर्थी से 5 से 10 लाख में सेंटिंग की गई थी. एडवांस में 50 हजार से 2 लाख रुपये लिए भी गए थे. परीक्षा से पूर्व ये लोग अभ्यर्थियों को नकल के लिए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी उपलब्ध कराया था. इसके एवज में 20 से 25 हजार रुपए नगद ले लिया गया था. इतना ही नहीं सेटरों ने बंधक के रूप में अभ्यर्थियों का मूल प्रमाणपत्र भी ले रखा था. जिसके सहारे परीक्षा के उपरांत वे अभ्यर्थियों से दो से ढाई लाख रूपये लेते. बाद में अंतिम चयन के उपरांत 05 से 10 लाख रूपया डील के अनुरूप लिया जाता.

Leave a Comment

Read More

error: Content is protected !!