
मिथिला पब्लिक न्यूज़, डेस्क ।
समस्तीपुर के तेज तर्रार पुलिस अधीक्षक
एक तरफ जिले की पुलिसिंग को सुधारने में जी-जान से जुटे हैं, वहीं विभाग के ही कुछ कर्मियों के कारिस्तानियों के कारण पुलिस की छवि धूमिल होती जा रही है. समस्तीपुर पुलिस ‘महिला सिपाही सुसाइड’ मामले के बाद एक बार फिर से चर्चा में आ गयी है. इस बार पटोरी थाना क्षेत्र की एक युवती के द्वारा नगर थाने में दर्ज करायी गयी एक हास्यास्पद प्राथमिकी ने पुलिस की कार्यशैली को कठघरे में ला खड़ा किया है. जिसमें उस युवती द्वारा कहा गया है कि रिल्स बनाने के लिए उसे एक पिस्टल चाहिए थी. एक अज्ञात मोबाइल धारक ने डुप्लीकेट बता कर उसे दो हजार रुपये में ओरिजनल पिस्टल थमा दिया. वह जब उस अज्ञात मोबाइल धारक को पिस्टल लौटाने समस्तीपुर बस स्टैंड आयी तो मोबाइल धारक ने फोन स्विच ऑफ कर लिया. इसके बाद वह थाना पर पहुंच कर पुलिस को घटना की जानकारी देते हुए केस दर्ज करायी.

कितनी आश्चर्य की बात है कि युवती के द्वारा एफआईआर में कही गयी जो बात कहीं से भी पचने लायक नहीं थी, उस पर पुलिस ने विश्वास कर एफआईआर भी दर्ज कर दिया. कथित रूप से पिस्टल के साथ रिल्स बनाने वाली उस युवती को ही इस केस का वादी बनाया गया. जिसमें एक मोबाइल नंबर और उसके अज्ञात धारक को आरोपित किया गया है. कितनी आश्चर्य की बात है कि एफआईआर दर्ज करने से पहले ना तो उस मोबाइल धारक को खोजा गया और ना ही उस मोबाइल धारक का नम्बर बताने वाली महिला से ही पूछताछ की गयी. वैसे पुलिस सूत्रों की मानें तो इस घटना में आंख मूंद कर एफआईआर दर्ज करना पुलिस के वरीय अधिकारियों की मजबूरी बन गयी थी. चर्चा है कि इस घटना के पीछे कुछ पुलिसकर्मियों का ही हाथ था. उनके कारगुजारियों पर पर्दा डालने के लिए और विभाग की गिरती साख को बचाने के लिए ऐसा किया गया है. हालांकि चर्चाओं में कितनी सच्चाई है यह तो निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ पायेगा. लेकिन इस घटना से पुलिस महकमे में चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म हो गया है.

रिल्स बनाने के शौक में खरीदी पिस्टल :
पटोरी की रहने वाली रागिनी कुमारी नाम की युवती ने एफआईआर में कहा है कि उसे अन्य लड़कियों को देखकर पिस्टल के साथ रिल्स बनाने का शौक हुआ था. जिसके बाद उसने रेलवे कॉलोनी में रहने वाली निशा दीदी को इसकी जानकारी दी और उससे पिस्टल की व्यवस्था करने को कहा. जिसपर निशा ने उसे बताया कि वह एक लड़के को जानती है, वह उसे पिस्टल उपलब्ध करा देगा. निशा ने उसे एक मोबाइल नंबर (7645002592) भी दिया. इसके बाद जब वह एक दिन कोर्ट के काम से समस्तीपुर पहुंची तो उक्त मोबाइल नंबर पर पिस्टल के लिए फोन किया. मोबाइल धारक ने उसे बस स्टैंड में बुलाया. बस स्टैंड में पहुंचने पर उस युवक ने उसे एक झोला में रखा पिस्टल दिया, जिसे वह अपने बैग में रख ली. इसके बाद उसने दो हजार रुपये उस युवक को दिये और वहां से घर आ गयी. युवती के अनुसार जब वह रिल्स बनाने के लिए पिस्टल निकाली तो घर के लोगों ने बताया कि यह तो ओरिजनल है. तब वह डर गयी और उस नम्बर पर फोन करके बोली कि पिस्टल हम वापस लौटा देंगे तुम मेरा दो हजार रुपए दे देना. एक दिन वह फिर वकील से मिलने पिस्टल लेकर कोर्ट पहुंची. वहां से बस स्टैंड पहुंच कर उक्त मोबाइल नंबर पर फोन की तो मोबाइल स्विच ऑफ बता रहा था. तब वह थाने पर आकर पुलिस को इसकी जानकारी दी.

वादी पर पहले से दर्ज है एफआईआर :
पटोरी थाना क्षेत्र के उत्तरी धमौन की रहने वाली इस कांड की वादी रागिनी कुमारी पर पूर्व से ही पटोरी थाना में एक एफआईआर संख्या : 577/2022 दर्ज है. जिसमें उसके दो भाई भी आरोपित हैं. इन पर उत्तरी धमौन गांव के ही प्रमोद कुमार की पत्नी रीना कुमारी ने 4 दिसंबर 2022 को केस दर्ज कराया था. जिसमें उस युवती के साथ उसके दोनों भाइयों पर गाली गलौज करते हुए उसके बुलेट बाइक को जला देने का आरोप लगाया गया था. बताया जा रहा है कि इसी केस में जमानत कराने के लिए वह कोर्ट और पुलिस का चक्कर लगा रही थी.

इन बातों पर क्यूं नहीं दिया ध्यान :
01 :
इस एफआईआर में मात्र एक अज्ञात मोबाइल धारक को ही अभियुक्त बनाया गया है. रेलवे कालोनी में रहने वाली जिस निशा दीदी ने हथियार मंगवाने में सहायता की. उसने ही हथियार उपलब्ध कराने वाले आरोपी मोबाइल धारक का नम्बर दिया था. वह कथित रूप से उक्त मोबाइल धारक को जानती भी थी तो किस कारण से उस मोबाइल धारक के नाम का खुलासा नहीं किया गया साथ ही मोबाइल धारक के साथ निशा नाम की उस महिला को भी क्यों नहीं इस मामले में आरोपित किया गया.
02 :
कितनी हास्यास्पद बात यह भी है कि सिर्फ रिल्स बनाने के लिए ही कोई लड़की दो हजार रुपये की पिस्टल कैसे खरीद सकती है. उसमें भी दो-चार सौ में मिलने वाली नकली पिस्टल के लिए दो हजार रुपये का भुगतान नहीं किया जा सकता. उधर, दूसरी ओर 30-40 हजार रुपए का सामान (पिस्टल) कैसे कोई किसी अनजान लड़की को मात्र दो हजार रुपये में दे दिया. इसके बाद वापस लेने से भी इनकार कर दिया. कहीं ऐसा तो नहीं कि इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश रची गयी थी.

03 :
एफआईआर में धारा लगाने में भी पुलिस कंजूसी कर गयी है. इस घटना को सिर्फ आर्म्स एक्ट की धारा लगाकर ही दर्ज किया गया. अगर मोबाइल धारक ने उक्त लड़की को ठग कर नकली पिस्टल के बदले ओरिजनल पिस्टल थमा दिया तो उसमें साजिश और ठगी की धारा क्यों नहीं लगायी गयी. छोटी बात पर हुई लड़ाई में यही पुलिस 7 से 8 धाराओं को लगा कर एफआईआर दर्ज करती है. उस समय तो पुलिस को आईपीसी की सभी धाराएं याद रहती है. तो इस घटना में ऐसी भूल क्यूं?
04 :
एफआईआर में घटना की कोई तिथि तक अंकित नहीं की गई है. लेकिन अगर एक आम आदमी के साथ लूट हो जाय तो पुलिस उस आदमी पर ही सबसे पहले शंका जाहिर करती है. उलजलूल सवालों को पूछती है, जैसे इतने पैसे कहा से आये, कहीं खुद तो रुपये पचाने के लिए साजिश तो नहीं किया, इन रुपयों का क्या करता, घर से कितने बजे निकले, घटना कितने बजे हुई, पुलिस को फोन करने में देरी क्यों की, लुटे गये सामान का पक्का रशीद है की नहीं आदि आदि.

क्या कहता है आरोपी मोबाइल धारक :
एफआईआर में दर्ज करायी गयी मोबाइल नंबर 7645002592 पर फोन करने पर राहुल नाम का एक छात्र फोन रिसीव करता है. वह अपने आप को विक्रमपुर बांदे गांव का रहने वाला बताता है. उसे इस घटना की कोई जानकारी नहीं है. वह इन सब बातों से अनभिज्ञ है और एक कॉलेज में थर्ड सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहा है. एफआईआर की जानकारी मिलने के बाद वह परेशान हो गया है. हां एक बात सोचनीय है कि उसका पिता और भाई थाने में पुलिस की गाड़ी चलाता है.

क्या कहते हैं पुलिस के वरीय अधिकारी :
पटोरी की एक युवती के लिखित शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. जिसमें पिस्टल देने वाले एक अज्ञात मोबाइल धारक को आरोपित किया गया है. पुलिस सभी बिंदुओं पर छानबीन कर रही है.
संजय कुमार पांडेय, सदर डीएसपी, समस्तीपुर











