गोपी! आपको सैल्यूट, आप जैसों से ही जिंदा है मानवता


मिथिला पब्लिक न्यूज़, डेस्क ।


स्वास्थ्य विभाग में कामचोर, निर्दयी, भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन इन सब के बीच कुछ ऐसे भी कर्मी हैं जो मानवता की मिशाल पेश करते हैं. वे बिना किसी लोभ-लालच के सदर अस्पताल पहुंचने वाले अज्ञात, मानसिक रूप से विछिप्त, गम्भीर घाव से पीड़ित मरीजों की देखभाल करते हैं. इन लोगों के सेवा के कारण कई अज्ञात मरीज मौत के मुंह से बाहर निकल कर अपने परिवार के पास जा चुके हैं.

इन्हीं में से एक है गोपी. जो इन दिनों एक अज्ञात गम्भीर घाव से पीड़ित मानसिक रूप से विछिप्त मरीज की एक महीने से लगातार सेवा कर चर्चा में बना हुआ है. सदर अस्पताल में गोपी वैसे तो कॉन्ट्रेक्टर का सफाईकर्मी है. लेकिन उसने बिना किसी लोभ-लालच के उस अज्ञात मरीज का सेवा करके एक मिसाल कायम किया है. उसके सेवा के कारण उस मरीज का घाव लगभग ठीक होने को है. गोपी अपने इस काम से बहुत खुश है. वह कहता है कि मुझे भगवान ने इस लायक बनाया कि मैं गरीब असहाय की सेवा कर सकूं. मुझे कभी घिन्न नहीं आती, बल्कि मेरी आत्मा को संतुष्टि मिलती है.


बताया जाता है कि करीब एक माह पूर्व कुछ लोग एक अज्ञात मरीज को इमरजेंसी वार्ड में लाकर छोड़ गए थे. उस समय उसके दोनों पैर में भयानक घाव था. उस घाव से पिल्लू तक निकल रहे थे. मरीज अपने पैर पर खड़ा भी नहीं हो पा रहा था. दुर्गंध के कारण स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने उसे इमरजेंसी वार्ड से बाहर निकाल दिया था.

जिसके बाद सफाईकर्मी गोपी की नजर उस पर पड़ी. गोपी उसे व्हील चेयर पर बैठाकर ओपीडी के पास ले गया. उसे नहलाया, उसके घाव की सफाई की, फिर उसका ड्रेसिंग किया. इसके बाद अपने पुराने कपड़े उसे पहनाया. उसे खाने लाकर दिया. इसके बाद लगभग प्रतिदिन जब भी उसे अपने काम से फुर्सत मिलती है तब वह उस मरीज की सेवा एवं उसके घाव की साफ सफाई करता है.

उसके एक महीने की सेवा के कारण मरीज के पैर का घाव अब ठीक होने के कगार पर पहुंच चुका है. वह अब अपने पैरों पर भी खड़ा हो जाता है, थोड़ा बहुत चल भी लेता है. मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण इस मरीज को अपनी कोई सुध भी नहीं रहती है. जिस कारण वह बेड पर ही शौच कर देता है, जिस वजह से स्वास्थ्य कर्मी उसे इमरजेंसी वार्ड में नहीं रहने देते. जिस वजह से गोपी उसे अस्पताल परिसर में जहां जगह मिल जाता वहीं रखकर उसकी सेवा करता है.

गोपी को इस काम में इमरजेंसी वार्ड में तैनात एक चतुर्थवर्गीय कर्मी नीरज का भी साथ मिलता है. पूर्व में नीरज के सेवा से कई अज्ञात मानसिक रूप से विछिप्त मरीज पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं. इसमें कई तो ऐसे भी थे जो दूसरे प्रदेशों से भटक कर यहां आ गये थे. हिंदी भाषी भी नहीं थे. उन्हें उनके परिवार से मिलाने भी इनलोगों ने सराहनीय भूमिका निभाई थी.

Leave a Comment

Read More

error: Content is protected !!