“लकवा” सिर्फ शरीर को ही नहीं जिंदगी को भी कर देती है बेजान : डॉ जेड आजाद

मिथिला पब्लिक न्यूज़, समस्तीपुर ।


लकवा” सिर्फ शरीर को ही नहीं जिंदगी को भी बेजान कर देती है. लकवा मनुष्य को आजीवन विकलांग बना सकती है. अगर समय रहते इलाज इसका इलाज न हो.  उक्त बातें पटना के मेडाज न्यूरो एंड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ जेड आजाद ने कही. वे शनिवार को शहर के एक होटल में आयोजित स्वास्थ्य जागरुकता कार्यकम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने स्ट्रोक यानी लकवा की पहचान, उससे बचाव व इलाज की विस्तारपूर्वक जानकारी दी. उन्होनें बताया कि स्ट्रोक यानी लकवा में मरीज का मुंह तिरछा हो जाता है, हाथ बेजान हो जाते हैं, जुबान लड़खड़ाने लगती है या आवाज पूरी तरह चली जाती है. ऐसा होने पर समय रहते इलाज न मिले तो परिणाम घातक हो सकता है. स्ट्रोक आने के तुरंत बाद जल्द से जल्द 5 घंटे के अंदर मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जाना चाहिए. ताकि उनकी जान बचायी जा सके.

कार्यक्रम में मौजूद डॉ रज़ि अहमद एवं डॉ राजीव मिश्र ने बताया कि स्ट्रोक आने पर मस्तिष्क की कोशिकाओं के बहुत तेज़ी से नष्ट होने और बनने की गति बहुत धीमी हो जाने से मरीज की स्थिति गंभीर होने की आशंका बढ़ जाती है. पटना स्थित मेडाज न्यूरो एंड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में स्ट्रोक (लकवा) बिमारी से ग्रस्त मरीजों का इलाज किया जाता है. मेडाज हॉस्पिटल के द्वारा विश्व स्ट्रोक दिवस पर लकवा का सही इलाज एवं निदान सहित इसके रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. जिसमें विशेषज्ञों के द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में जाकर लोगों को जागरुक किया जा रहा है. अभियान का उद्देश्य स्ट्रोक जैसी भयावह बीमारी से हो रही मौत एवं विकलांगता को रोकने के साथ ही प्रारंभिक चरण में उसकी पहचान कर समय पर इलाज व जीवनशैली में सुधार कर इस बीमारी को बढने से रोकना है. उन्होनें बताया कि स्ट्रोक के लक्षण एवं संदेह की स्थिति में नि:संकोच कदम बढ़ाने एवं अपने परिवार और दोस्तों को जागरूक करने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि हर चार व्यक्ति में एक को स्ट्रोक आता है. दुनिया में इससे मरने वालों एवं विकलांग होने की संख्या काफी अधिक है. इस अवसर पर मेदाज़ हॉस्पिटल के यूनिट हेड सद्दाम मोहम्मद भी मौजूद थे.

जानलेवा होता जा रहा मानसिक तनाव व गुस्सा :
भागदौड़ भरी जीवनशैली, मानसिक तनाव, गुस्सा और स्वास्थ्य के प्रति ध्यान नहीं देना जानलेवा साबित हो रहा है. इस अव्यवस्थित जीवनशैली से मस्तिष्क घात (ब्रेन स्ट्रोक) के मरीजों की संख्या बढ़ रही है. बुजुर्गों के साथ युवाओं को भी यह अपने चपेट में ले रही है. डॉक्टर बताते हैं कि हार्ट अटैक की तरह स्ट्रोक भी एक गंभीर बीमारी है. जो मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होने के कारण होता है. यह मस्तिष्क में आक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति को रोक देता है. मस्तिष्क में आक्सीजन नहीं मिलने से उसकी कोशिकाएं मर जाती हैं, जिस कारण व्यक्ति याददाश्त खोने लगता है. आदमी किसी तरह अपने रक्त संचार को नियंत्रित कर ले तो इस बीमारी से बचा जा सकता है. इसके लिए खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए. स्ट्रोक किसी भी उम्र के व्यक्ति को किसी भी समय हो सकता है.

उपचार से ज्यादा बचाव कारगर :
बताया जाता है कि स्ट्रोक के उपचार से ज्यादा बचाव ही कारगर होता है. इससे बचाव पर अधिक बल देने की जरूरत है. स्ट्रोक आने पर दिमाग में खून की सप्लाई रुक जाती है. इससे ब्रेन सेल्स को काफी नुकसान पहुंचता एवं कभी-कभी तो ब्रेन सेल्स मर भी जाते हैं. जिससे पैरालिसिस एवं गंभीर स्थिति में मृत्यु भी हो सकती है. संतुलित जीवन-शैली को अपनाकर स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सकता है. धूम्रपान, तंबाकू का सेवन, खानपान के प्रति गंभीर नहीं होना, मोटापन, शराब का सेवन, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्राल, हृदय रोग एवं दिमाग में जा रही धमनियों में कोलेस्ट्रोल जमा होने से स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है.

शुरूआती लक्षण दिखते ही हो जायें अलर्ट :

पटना के मेडाज न्यूरो एंड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ जेड आजाद के अनुसार स्ट्रोक एक जटिल मेडिकल समस्या है. इसके शुरुआती लक्षण दिखते ही अलर्ट हो जाना चाहिए. स्ट्रोक का शुरुआती लक्षणों के आधार पर ही इससे बचाव संभव है. इसलिए चेहरा जब एक तरफ मुड़ने लगे. किसी एक बाँह में दर्द होने लगे. आवाज लड़खाड़ने लगे या बोलने में तकलीफ हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए. स्ट्रोक से बचने के लिए उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखना चाहिए. धूम्रपान एवं मद्यपान न करें, ब्लड शुगर एवं कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करें, शारीरिक गतिविधि बनाए रखें, मोटापा कम करें, स्वास्थ्य का नियमित जांच कराए. उन्होंने बताया की इस तरह अपने स्वास्थ्य की जांच कराते रहेंगे तो स्ट्रोक का खतरा कम रहेगा और स्ट्रोक से बचा जा सकता है.



स्ट्रोक के प्रकार :
1. इस्केमिक स्ट्रोक : यह स्ट्रोक मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाले रक्त वाहिका में बाधा पहुंचने पर होता है. रक्त प्रवाह में बाधा रक्त को थक्का बना सकता है. इसे सेरेब्रल थ्रोम्बोसिस कहा जाता है. इसका मुख्य कारण रक्त वाहिकाओं और धमनियों (एथेरोस्क्लेरोसिस) में वसा का जमना होता है.

2. रक्तस्रावी स्ट्रोक : रक्तस्रावी स्ट्रोक तब होता है जब एक कमजोर रक्त वाहिका टूट जाती है और मस्तिष्क में खून बहता है. रक्त बहाव आसपास के मस्तिष्क के ऊतकों पर दबाव बनाता है. इससे गंभीरता बढ़ जाती है. यदि सही समय पर चिकित्सकीय सेवा नहीं ली जाए तब यह जानलेवा हो जाती है.



स्ट्रोक से बचाव के उपाय :
– ब्लडप्रेशर को नियंत्रित रखें.
– मोटापा को कम करें.
– वसा को कंट्रोल रखें.
– नियमित व्यायाम करें.
–  धूम्रपान एवं शराब सेवन से बचें.
– अत्यधिक वसा वाले खाने से दूर रहें.

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