ठंड में आंखों की एलर्जी से सावधान रहने की जरूरत : डॉ अमलेंदु पाण्डेय

मरीज के आंखों की जांच करते नेत्र रोग विशेषज्ञ

मिथिला पब्लिक न्यूज़, डेस्क रिपोर्ट ।

मौसम ने करवट लिया है. तापमान में लगातार गिरावट आ रही है, हवा में ठंड का एहसास बढ़ गया है. ऐसे में सावधानी बहुत जरूरी है. ठंढ बढ़ने के साथ ही लोगों की कई परेशानियां भी बढ़ जाती है. खासकर ऐसे समय में आंखों में एलर्जी की समस्या बढ़ जाती है. इसका असर अस्पतालों में भी दिखाई देने लगा है. नेत्र विकार की समस्याओं को लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है.

डॉ बालेश्वर पाण्डेय मेमोरियल अस्पताल के संचालक सह नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अमलेंदु कुमार पाण्डेय कहते हैं कि कंजंक्टिवा आंखों की एक बेहद मुलायम और पारदर्शी त्वचा है जो हमारी भीतरी आंख पर एक पारदर्शी परदे का काम करती है. मौसमी बदलाव के साथ कई बार आंखों में एलर्जी की समस्या बढ़ जाती है. एलर्जी होने पर आमतौर पर आंखों की इसी बाहरी परत पर असर पड़ता है. इस के प्रभाव से आंखें लाल हो जाती हैं. उन में खुजली होने लगती है और आंखों से पानी निकलने लगता है. इससे मोतियाबिंद के मरीजों की परेशानी भी काफी बढ़ जाती है. इसलिए ठंढ के समय में आंखों की एलर्जी से सावधान रहने की जरूरत है.


एंटीएलर्जिक दवाइयां भी पहुंचाती है नुकसान :
डॉ श्री पाण्डेय बताते हैं कि आमतौर पर सर्दी-जुकाम में ली जाने वाली एंटीएलर्जिक दवाओं का असर भी आंखों पर पड़ता है. इनमें मौजूद कुछ खास रासायनिक तत्त्व नमी बनाने वाले आंसुओं के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं. जिससे आंसू कम बनता है, धुंधला दिखाई देता है, आंखों में खुजली होने लगती है. लंबे समय तक इन दवाओं का इस्तेमाल करने से कॉर्निया पर भी असर पड़ सकता है.


कुछ समय पर आंखों को दें आराम :
लगातार कम्प्यूटर, मोबाइल, टीवी और लैपटॉप पर काम करते या देखते समय लोग पलकें कम झपकाते हैं. इससे आंखों की नमी सूखने लगती है. आंखों में जलन, पानी आना और लाल होना जैसे लक्षण सामने आने लगते हैं. कई बार धुंधला दिखने की समस्या भी हो सकती है. ऐसे में इस दौरान 5-5 मिनट के अंतराल पर एक-दो सेकंड के लिए आंखें बंद कर उसे आराम देना चाहिए. खासकर रात में स्क्रीन देखने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे नींद भी प्रभावित होती है.


लंबे समय तक नहीं लें आईड्रॉप :
अक्सर डॉक्टर कुछ दिनों के लिए आईड्रॉप डालने की सलाह देते हैं, लेकिन आईड्रॉप बच जाने पर लोग उसे आगे भी प्रयोग करते रहते हैं. या किसी तरह की समस्या आने पर फिर बिना डॉक्टर से परामर्श लिए उसी आइड्रॉप्स का इस्तेमाल करते हैं. ऐसा न करें, क्योंकि आईड्रॉप को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए बीकेसी कैमिकल मिलाया जाता है. जो ड्रायआई सिंड्रोम का कारण बन सकता है.



कुछ ऐसे बरतें सावधानी :
1. सर्दियों के मौसम में भी भरपूर मात्रा में पानी पीना चाहिए. अपने शरीर को हाइड्रेटेड रखने से लेकर आपकी आंखों में नमी बनाए रखने में मदद मिलेगी.
2. ठंड से बचने के लिए हीटर का कम से कम इस्तेमाल करें. खासकर अपने चेहरे पर सीधे हीटर की गर्मी ना पड़ने दें, क्योंकि इससे आंखों की नमी कम हो सकती है.
3. धूल के कण या ठंडी हवाओं से आंखों को बचाने के लिए चश्मा और टोपी का इस्तेमाल करें. खासकर सर्द हवा के चलने पर आंखों पर चश्मा जरूर लगाएं.
4. आंखों को 3-4 बार से अधिक नहीं धोना चाहिए. इससे आंखों की चिकनाई में कमी आती है. धूलकण पर जाने पर पानी का छींटा मारकर साफ करना चाहिए.

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